حَدَّثَنَا الْقَعْنَبِيُّ، وَأَحْمَدُ بْنُ يُونُسَ، قَالاَ حَدَّثَنَا مَالِكٌ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ الْقَاسِمِ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ كُنْتُ أُطَيِّبُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم لإِحْرَامِهِ قَبْلَ أَنْ يُحْرِمَ وَلإِحْلاَلِهِ قَبْلَ أَنْ يَطُوفَ بِالْبَيْتِ .
A’ishah said ; I used to perfume the Messenger of Allah (SWAS) preparatory to his entering the sacred state before he put on Ihram, and preparatory to putting off Ihram before he made the circuits round the House (the Ka’bah)
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAl-Albani
SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
SahihShuaib Al Arnaut
Sahih Bukhari (1539) Sahih Muslim (1189)Zubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।