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सुनन अबू दाऊद

नंबर 1735

नंबर 1735किताब 11, नंबर 15
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ صَالِحٍ، حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي فُدَيْكٍ، أَخْبَرَنِي ابْنُ أَبِي ذِئْبٍ، عَنْ عُبَيْدِ بْنِ عُمَيْرٍ، - قَالَ أَحْمَدُ بْنُ صَالِحٍ كَلاَمًا مَعْنَاهُ أَنَّهُ مَوْلَى ابْنِ عَبَّاسٍ - عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبَّاسٍ، أَنَّ النَّاسَ، فِي أَوَّلِ مَا كَانَ الْحَجُّ كَانُوا يَبِيعُونَ فَذَكَرَ مَعْنَاهُ إِلَى قَوْلِهِ مَوَاسِمِ الْحَجِّ ‏.‏
Abd Allah bin `Abbas said :In the beginning when Hajj was prescribed, people used to trade during Hajj. The narrator then narrated the rest of the tradition upto the words, `season of Hajj’
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • Sahih LighairihiMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 11 · The Rites of Hajj (Kitab Al-Manasik Wa'l-Hajj)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।