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सुनन अबू दाऊद

नंबर 1725

नंबर 1725किताब 11, नंबर 5
حَدَّثَنَا يُوسُفُ بْنُ مُوسَى، عَنْ جَرِيرٍ، عَنْ سُهَيْلٍ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ أَبِي سَعِيدٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَذَكَرَ نَحْوَهُ إِلاَّ أَنَّهُ قَالَ ‏ "‏ بَرِيدًا ‏"‏ ‏.‏
Abu Hurairah reported the Messenger of Allah (SWAS) as saying :He then reported the same tradition as mentioned above but he mentioned (in this version) the word “mail post”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • ShadhAl-Albani
  • ShadhMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • ShadhShuaib Al Arnaut
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 11 · The Rites of Hajj (Kitab Al-Manasik Wa'l-Hajj)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।