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सुनन अबू दाऊद

नंबर 145

नंबर 145किताब 1, नंबर 145
حَدَّثَنَا أَبُو تَوْبَةَ، - يَعْنِي الرَّبِيعَ بْنَ نَافِعٍ - حَدَّثَنَا أَبُو الْمَلِيحِ، عَنِ الْوَلِيدِ بْنِ زَوْرَانَ، عَنْ أَنَسٍ يَعْنِي ابْنَ مَالِكٍ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم كَانَ إِذَا تَوَضَّأَ أَخَذَ كَفًّا مِنْ مَاءٍ فَأَدْخَلَهُ تَحْتَ حَنَكِهِ فَخَلَّلَ بِهِ لِحْيَتَهُ وَقَالَ ‏ "‏ هَكَذَا أَمَرَنِي رَبِّي عَزَّ وَجَلَّ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو دَاوُدَ ابْنُ زَوْرَانَ رَوَى عَنْهُ حَجَّاجُ بْنُ حَجَّاجٍ وَأَبُو الْمَلِيحِ الرَّقِّيُّ ‏.‏
Narrated Anas ibn Malik: Whenever the Messenger of Allah (ﷺ) performed ablution, he took a handful of water, and, putting it under his chin, made it go through his beard, saying: Thus did my Lord command me
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Muhyi Al-Din Abdul Hamid
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · Purification (Kitab Al-Taharah)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।