Tafsir As-Saadi - Urdu
सूरह 26
Ash-Shu'araa
यह अरबी के अलावा किसी और भाषा में एक तफ़सीर है, जैसी Quranic Universal Library (QUL, Tarteel की) में है, QUL के डेटा की उस खुली प्रति से ली गई जो spa5k/tafsir_api रखता है। QUL के रिकॉर्ड में यह नहीं बताया गया कि इसे किसने लिखा या अनुवाद किया या यह किस छपे संस्करण का अनुसरण करती है, और पाठ के लिए कोई लाइसेंस नहीं बताया गया, इसलिए इसे दिखाने का अधिकार सत्यापित नहीं है। किसी ने इसे छपी किताब से नहीं मिलाया है और किसी आलिम ने इसकी समीक्षा नहीं की है। हर अंश उन आयतों के पास है जिन पर वह टिप्पणी करता है; वे आयतें Tanzil का क़ुरआनी पाठ हैं, जैसा वहाँ है। सबील ने इसमें से कुछ भी न लिखा है, न अनुवाद किया है।
पाठ का स्रोत:Quranic Universal Libraryspa5k/tafsir_apiMIT2026-10-21 को लिया गया
अंश
- आयतें 1–9طسٓمٓ
- आयतें 10–68وَإِذْ نَادَىٰ رَبُّكَ مُوسَىٰٓ أَنِ ٱئْتِ ٱلْقَوْمَ ٱلظَّـٰلِمِينَ
- आयतें 69–104وَٱتْلُ عَلَيْهِمْ نَبَأَ إِبْرَٰهِيمَ
- आयतें 105–122كَذَّبَتْ قَوْمُ نُوحٍ ٱلْمُرْسَلِينَ
- आयतें 123–140كَذَّبَتْ عَادٌ ٱلْمُرْسَلِينَ
- आयतें 141–159كَذَّبَتْ ثَمُودُ ٱلْمُرْسَلِينَ
- आयतें 160–175كَذَّبَتْ قَوْمُ لُوطٍ ٱلْمُرْسَلِينَ
- आयतें 176–191كَذَّبَ أَصْحَـٰبُ لْـَٔيْكَةِ ٱلْمُرْسَلِينَ
- आयतें 192–203وَإِنَّهُۥ لَتَنزِيلُ رَبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ
- आयतें 204–207أَفَبِعَذَابِنَا يَسْتَعْجِلُونَ
- आयतें 208–212وَمَآ أَهْلَكْنَا مِن قَرْيَةٍ إِلَّا لَهَا مُنذِرُونَ
- आयतें 213–216فَلَا تَدْعُ مَعَ ٱللَّهِ إِلَـٰهًا ءَاخَرَ فَتَكُونَ مِنَ ٱلْمُعَذَّبِينَ
- आयतें 217–220وَتَوَكَّلْ عَلَى ٱلْعَزِيزِ ٱلرَّحِيمِ
- आयतें 221–227هَلْ أُنَبِّئُكُمْ عَلَىٰ مَن تَنَزَّلُ ٱلشَّيَـٰطِينُ