Tafsīr ath-Thaʿālibī
सूरह 55
Ar-Rahmaan
الجواهر الحسان في تفسير القرآنयह एक शास्त्रीय तफ़सीर का अरबी पाठ है, जैसा Quranic Universal Library (QUL, Tarteel की) में है, QUL के डेटा की उस खुली प्रति से लिया गया जो spa5k/tafsir_api रखता है। QUL यह नहीं बताती कि वह किस छपे संस्करण का अनुसरण करती है और पाठों के लिए कोई लाइसेंस नहीं बताती, इसलिए उन्हें दिखाने का अधिकार सत्यापित नहीं है। किसी ने इसे छपी किताब या पांडुलिपि से नहीं मिलाया है और किसी आलिम ने इसकी समीक्षा नहीं की है। हर अंश उन आयतों के पास है जिन पर वह टिप्पणी करता है; वे आयतें Tanzil का क़ुरआनी पाठ हैं, जैसा वहाँ है। जहाँ पाठ में संपादक की कोई टिप्पणी दोहरे कोष्ठक में है, वहाँ वह जैसी है वैसी दिखाई गई है। अभी कोई अनुवाद नहीं है।
पाठ का स्रोत:Quranic Universal Libraryspa5k/tafsir_apiMIT2026-10-21 को लिया गया
अंश
- आयतें 1–5ٱلرَّحْمَـٰنُ
- आयतें 6–13وَٱلنَّجْمُ وَٱلشَّجَرُ يَسْجُدَانِ
- आयतें 14–21خَلَقَ ٱلْإِنسَـٰنَ مِن صَلْصَـٰلٍ كَٱلْفَخَّارِ
- आयतें 22–25يَخْرُجُ مِنْهُمَا ٱللُّؤْلُؤُ وَٱلْمَرْجَانُ
- आयतें 26–28كُلُّ مَنْ عَلَيْهَا فَانٍ
- आयतें 29–36يَسْـَٔلُهُۥ مَن فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ ۚ كُلَّ يَوْمٍ هُوَ فِى شَأْنٍ
- आयतें 37–45فَإِذَا ٱنشَقَّتِ ٱلسَّمَآءُ فَكَانَتْ وَرْدَةً كَٱلدِّهَانِ
- आयतें 46–57وَلِمَنْ خَافَ مَقَامَ رَبِّهِۦ جَنَّتَانِ
- आयतें 58–61كَأَنَّهُنَّ ٱلْيَاقُوتُ وَٱلْمَرْجَانُ
- आयतें 62–78وَمِن دُونِهِمَا جَنَّتَانِ