Tafsīr ath-Thaʿālibī
सूरह 44
Ad-Dukhaan
الجواهر الحسان في تفسير القرآنयह एक शास्त्रीय तफ़सीर का अरबी पाठ है, जैसा Quranic Universal Library (QUL, Tarteel की) में है, QUL के डेटा की उस खुली प्रति से लिया गया जो spa5k/tafsir_api रखता है। QUL यह नहीं बताती कि वह किस छपे संस्करण का अनुसरण करती है और पाठों के लिए कोई लाइसेंस नहीं बताती, इसलिए उन्हें दिखाने का अधिकार सत्यापित नहीं है। किसी ने इसे छपी किताब या पांडुलिपि से नहीं मिलाया है और किसी आलिम ने इसकी समीक्षा नहीं की है। हर अंश उन आयतों के पास है जिन पर वह टिप्पणी करता है; वे आयतें Tanzil का क़ुरआनी पाठ हैं, जैसा वहाँ है। जहाँ पाठ में संपादक की कोई टिप्पणी दोहरे कोष्ठक में है, वहाँ वह जैसी है वैसी दिखाई गई है। अभी कोई अनुवाद नहीं है।
पाठ का स्रोत:Quranic Universal Libraryspa5k/tafsir_apiMIT2026-10-21 को लिया गया
अंश
- आयतें 1–3حمٓ
- आयतें 4–17فِيهَا يُفْرَقُ كُلُّ أَمْرٍ حَكِيمٍ
- आयतें 18–24أَنْ أَدُّوٓا۟ إِلَىَّ عِبَادَ ٱللَّهِ ۖ إِنِّى لَكُمْ رَسُولٌ أَمِينٌ
- आयतें 25–36كَمْ تَرَكُوا۟ مِن جَنَّـٰتٍ وَعُيُونٍ
- आयतें 37–42أَهُمْ خَيْرٌ أَمْ قَوْمُ تُبَّعٍ وَٱلَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۚ أَهْلَكْنَـٰهُمْ ۖ إِنَّهُمْ كَانُوا۟ مُجْرِمِينَ
- आयतें 43–49إِنَّ شَجَرَتَ ٱلزَّقُّومِ
- आयतें 50–54إِنَّ هَـٰذَا مَا كُنتُم بِهِۦ تَمْتَرُونَ
- आयतें 55–59يَدْعُونَ فِيهَا بِكُلِّ فَـٰكِهَةٍ ءَامِنِينَ