Tafsīr aṭ-Ṭabarī
सूरह 69
Al-Haaqqa
جامع البيان في تأويل آي القرآنयह एक शास्त्रीय तफ़सीर का अरबी पाठ है, जैसा Quranic Universal Library (QUL, Tarteel की) में है, QUL के डेटा की उस खुली प्रति से लिया गया जो spa5k/tafsir_api रखता है। QUL यह नहीं बताती कि वह किस छपे संस्करण का अनुसरण करती है और पाठों के लिए कोई लाइसेंस नहीं बताती, इसलिए उन्हें दिखाने का अधिकार सत्यापित नहीं है। किसी ने इसे छपी किताब या पांडुलिपि से नहीं मिलाया है और किसी आलिम ने इसकी समीक्षा नहीं की है। हर अंश उन आयतों के पास है जिन पर वह टिप्पणी करता है; वे आयतें Tanzil का क़ुरआनी पाठ हैं, जैसा वहाँ है। जहाँ पाठ में संपादक की कोई टिप्पणी दोहरे कोष्ठक में है, वहाँ वह जैसी है वैसी दिखाई गई है। अभी कोई अनुवाद नहीं है।
पाठ का स्रोत:Quranic Universal Libraryspa5k/tafsir_apiMIT2026-10-21 को लिया गया
अंश
- आयतें 1–4ٱلْحَآقَّةُ
- आयतें 5–8فَأَمَّا ثَمُودُ فَأُهْلِكُوا۟ بِٱلطَّاغِيَةِ
- आयतें 9–12وَجَآءَ فِرْعَوْنُ وَمَن قَبْلَهُۥ وَٱلْمُؤْتَفِكَـٰتُ بِٱلْخَاطِئَةِ
- आयतें 13–15فَإِذَا نُفِخَ فِى ٱلصُّورِ نَفْخَةٌ وَٰحِدَةٌ
- आयतें 16–18وَٱنشَقَّتِ ٱلسَّمَآءُ فَهِىَ يَوْمَئِذٍ وَاهِيَةٌ
- आयतें 19–21فَأَمَّا مَنْ أُوتِىَ كِتَـٰبَهُۥ بِيَمِينِهِۦ فَيَقُولُ هَآؤُمُ ٱقْرَءُوا۟ كِتَـٰبِيَهْ
- आयतें 22–24فِى جَنَّةٍ عَالِيَةٍ
- आयतें 25–28وَأَمَّا مَنْ أُوتِىَ كِتَـٰبَهُۥ بِشِمَالِهِۦ فَيَقُولُ يَـٰلَيْتَنِى لَمْ أُوتَ كِتَـٰبِيَهْ
- आयतें 29–33هَلَكَ عَنِّى سُلْطَـٰنِيَهْ
- आयतें 34–37وَلَا يَحُضُّ عَلَىٰ طَعَامِ ٱلْمِسْكِينِ
- आयतें 38–42فَلَآ أُقْسِمُ بِمَا تُبْصِرُونَ
- आयतें 43–46تَنزِيلٌ مِّن رَّبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ
- आयतें 47–52فَمَا مِنكُم مِّنْ أَحَدٍ عَنْهُ حَـٰجِزِينَ