Az-Zumar
جامع البيان في تأويل آي القرآنयह एक शास्त्रीय तफ़सीर का अरबी पाठ है, जैसा Quranic Universal Library (QUL, Tarteel की) में है, QUL के डेटा की उस खुली प्रति से लिया गया जो spa5k/tafsir_api रखता है। QUL यह नहीं बताती कि वह किस छपे संस्करण का अनुसरण करती है और पाठों के लिए कोई लाइसेंस नहीं बताती, इसलिए उन्हें दिखाने का अधिकार सत्यापित नहीं है। किसी ने इसे छपी किताब या पांडुलिपि से नहीं मिलाया है और किसी आलिम ने इसकी समीक्षा नहीं की है। हर अंश उन आयतों के पास है जिन पर वह टिप्पणी करता है; वे आयतें Tanzil का क़ुरआनी पाठ हैं, जैसा वहाँ है। जहाँ पाठ में संपादक की कोई टिप्पणी दोहरे कोष्ठक में है, वहाँ वह जैसी है वैसी दिखाई गई है। अभी कोई अनुवाद नहीं है।
पाठ का स्रोत:Quranic Universal Libraryspa5k/tafsir_apiMIT2026-10-21 को लिया गया
أَوَلَمْ يَعْلَمُوٓا۟ أَنَّ ٱللَّهَ يَبْسُطُ ٱلرِّزْقَ لِمَن يَشَآءُ وَيَقْدِرُ ۚ إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَـٰتٍ لِّقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ 52
القول في تأويل قوله تعالى: ﴿أَوَلَمْ يَعْلَمُوا أَنَّ اللَّهَ يَبْسُطُ الرِّزْقَ لِمَنْ يَشَاءُ وَيَقْدِرُ إِنَّ فِي ذَلِكَ لآيَاتٍ لِقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ (٥٢) ﴾
يقول تعالى ذكره: أولم يعلم يا محمد هؤلاء الذين كشفنا عنهم ضرهم، فقالوا: إنما أوتيناه على علم منا، أن الشدة والرخاء والسعة والضيق والبلاء بيد الله، دون كل من سواه، يبسط الرزق لمن يشاء، فيوسعه عليه، ويقدر ذلك على من يشاء من عباده، فيضيقه، وأن ذلك من حجج الله على عباده، ليعتبروا به ويتذكروا، ويعلموا أن الرغبة إليه والرهبة دون الآلهة والأنداد. ﴿إِنَّ فِي ذَلِكَ لآيَاتٍ﴾ يقول: إن في بسط الله الرزق لمن يشاء، وتقتيره على من أراد لآيات، يعني: دلالات وعلامات ﴿لِقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ﴾ يعني: يصدقون بالحقّ، فيقرّون به إذا تبينوه وعلموا حقيقته أن الذي يفعل ذلك هو الله دون كل ما سواه.