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Tafsīr aṭ-Ṭabarī · Az-Zumar
सूरह 39

Az-Zumar

جامع البيان في تأويل آي القرآن

यह एक शास्त्रीय तफ़सीर का अरबी पाठ है, जैसा Quranic Universal Library (QUL, Tarteel की) में है, QUL के डेटा की उस खुली प्रति से लिया गया जो spa5k/tafsir_api रखता है। QUL यह नहीं बताती कि वह किस छपे संस्करण का अनुसरण करती है और पाठों के लिए कोई लाइसेंस नहीं बताती, इसलिए उन्हें दिखाने का अधिकार सत्यापित नहीं है। किसी ने इसे छपी किताब या पांडुलिपि से नहीं मिलाया है और किसी आलिम ने इसकी समीक्षा नहीं की है। हर अंश उन आयतों के पास है जिन पर वह टिप्पणी करता है; वे आयतें Tanzil का क़ुरआनी पाठ हैं, जैसा वहाँ है। जहाँ पाठ में संपादक की कोई टिप्पणी दोहरे कोष्ठक में है, वहाँ वह जैसी है वैसी दिखाई गई है। अभी कोई अनुवाद नहीं है।

पाठ का स्रोत:Quranic Universal Libraryspa5k/tafsir_apiMIT2026-10-21 को लिया गया

आयत 4

لَّوْ أَرَادَ ٱللَّهُ أَن يَتَّخِذَ وَلَدًا لَّٱصْطَفَىٰ مِمَّا يَخْلُقُ مَا يَشَآءُ ۚ سُبْحَـٰنَهُۥ ۖ هُوَ ٱللَّهُ ٱلْوَٰحِدُ ٱلْقَهَّارُ 4

القول في تأويل قوله تعالى: ﴿إِنَّ اللَّهَ لا يَهْدِي مَنْ هُوَ كَاذِبٌ كَفَّارٌ ٣ لَوْ أَرَادَ اللَّهُ أَنْ يَتَّخِذَ وَلَدًا لاصْطَفَى مِمَّا يَخْلُقُ مَا يَشَاءُ سُبْحَانَهُ هُوَ اللَّهُ الْوَاحِدُ الْقَهَّارُ (٤) ﴾

يقول تعالى ذكره: ﴿إِنَّ اللَّهَ لا يَهْدِي﴾ إلى الحق ودينه الإسلام، والإقرار بوحدانيته، فيوفقه له ﴿مَنْ هُوَ كَاذِبٌ﴾ مفتر على الله، يتقول عليه الباطل، ويضيف إليه ما ليس من صفته، ويزعم أن له ولدا افتراء عليه، كفار لنعمه، جحودا لربوبيته.

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وقوله: ﴿لَوْ أَرَادَ اللَّهُ أَنْ يَتَّخِذَ وَلَدًا﴾

يقول تعالى ذكره: لو شاء الله اتخاذ ولد، ولا ينبغي له ذلك، لاصطفى مما يخلق ما يشاء، يقول: لاختار من خلقه ما يشاء.

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وقوله: ﴿سُبْحَانَهُ هُوَ اللَّهُ الْوَاحِدُ الْقَهَّارُ﴾

يقول: تنزيها لله عن أن يكون له ولد، وعما أضاف إليه المشركون به من شركهم (هُوَ اللَّهُ) يقول: هو الذي يَعْبده كلّ شيء، ولو كان له ولد لم يكن له عبدا، يقول: فالأشياء كلها له ملك، فأنى يكون له ولد، وهو الواحد الذي لا شريك له في ملكه وسلطانه، والقهار لخلقه بقدرته، فكل شيء له متذلل، ومن سطوته خاشع.