An-Noor
جامع البيان في تأويل آي القرآنयह एक शास्त्रीय तफ़सीर का अरबी पाठ है, जैसा Quranic Universal Library (QUL, Tarteel की) में है, QUL के डेटा की उस खुली प्रति से लिया गया जो spa5k/tafsir_api रखता है। QUL यह नहीं बताती कि वह किस छपे संस्करण का अनुसरण करती है और पाठों के लिए कोई लाइसेंस नहीं बताती, इसलिए उन्हें दिखाने का अधिकार सत्यापित नहीं है। किसी ने इसे छपी किताब या पांडुलिपि से नहीं मिलाया है और किसी आलिम ने इसकी समीक्षा नहीं की है। हर अंश उन आयतों के पास है जिन पर वह टिप्पणी करता है; वे आयतें Tanzil का क़ुरआनी पाठ हैं, जैसा वहाँ है। जहाँ पाठ में संपादक की कोई टिप्पणी दोहरे कोष्ठक में है, वहाँ वह जैसी है वैसी दिखाई गई है। अभी कोई अनुवाद नहीं है।
पाठ का स्रोत:Quranic Universal Libraryspa5k/tafsir_apiMIT2026-10-21 को लिया गया
وَلَوْلَا فَضْلُ ٱللَّهِ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَتُهُۥ وَأَنَّ ٱللَّهَ رَءُوفٌ رَّحِيمٌ 20
القول في تأويل قوله تعالى: ﴿وَلَوْلا فَضْلُ اللَّهِ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَتُهُ وَأَنَّ اللَّهَ رَءُوفٌ رَحِيمٌ (٢٠) ﴾
يقول تعالى ذكره: ولولا أن تفضَّل الله عليكم أيها الناس ورحمكم، وأن الله ذو رأفة، ذو رحمة بخلقه لهلكتم فيما أفضتم فيه، وعاجلتكم من الله العقوبة. وترك ذكر الجواب لمعرفة السامع بالمراد من الكلام بعده، وهو قوله: ﴿يَاأَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لا تَتَّبِعُوا خُطُوَاتِ الشَّيْطَانِ﴾ ... الآية.