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Tafsīr aṭ-Ṭabarī · Al-Baqara
सूरह 2

Al-Baqara

جامع البيان في تأويل آي القرآن

यह एक शास्त्रीय तफ़सीर का अरबी पाठ है, जैसा Quranic Universal Library (QUL, Tarteel की) में है, QUL के डेटा की उस खुली प्रति से लिया गया जो spa5k/tafsir_api रखता है। QUL यह नहीं बताती कि वह किस छपे संस्करण का अनुसरण करती है और पाठों के लिए कोई लाइसेंस नहीं बताती, इसलिए उन्हें दिखाने का अधिकार सत्यापित नहीं है। किसी ने इसे छपी किताब या पांडुलिपि से नहीं मिलाया है और किसी आलिम ने इसकी समीक्षा नहीं की है। हर अंश उन आयतों के पास है जिन पर वह टिप्पणी करता है; वे आयतें Tanzil का क़ुरआनी पाठ हैं, जैसा वहाँ है। जहाँ पाठ में संपादक की कोई टिप्पणी दोहरे कोष्ठक में है, वहाँ वह जैसी है वैसी दिखाई गई है। अभी कोई अनुवाद नहीं है।

पाठ का स्रोत:Quranic Universal Libraryspa5k/tafsir_apiMIT2026-10-21 को लिया गया

आयत 131

إِذْ قَالَ لَهُۥ رَبُّهُۥٓ أَسْلِمْ ۖ قَالَ أَسْلَمْتُ لِرَبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ 131

القول في تأويل قوله تعالى: ﴿إِذْ قَالَ لَهُ رَبُّهُ أَسْلِمْ قَالَ أَسْلَمْتُ لِرَبِّ الْعَالَمِينَ (١٣١) ﴾

قال أبو جعفر: يعني تعالى ذكره بقوله:"إذ قال له ربه أسلم"، إذ قال له ربه: أخلص لي العبادة، واخضع لي بالطاعة، وقد دللنا فيما مضى على معنى"الإسلام" في كلام العرب، فأغنى عن إعادته. [[انظر ما سلف ٢: ٥١٠، ٥١١، وهذا الجزء ٣: ٧٤.]]

* *

وأما معنى قوله:"قال أسلمت لرب العالمين"، فإنه يعني تعالى ذكره، قال إبراهيم مجيبا لربه: خضعت بالطاعة، وأخلصت العبادة، لمالك جميع الخلائق ومدبرها دون غيره.

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فإن قال قائل: قد علمت أن"إذ" وقت، فما الذي وقت به؟ وما الذي هو له صلة. [[في المطبوعة: "وما الذي صلته". والصواب ما أثبت.]]

قيل: هو صلة لقوله:"ولقد اصطفيناه في الدنيا". وتأويل الكلام: ولقد اصطفيناه في الدنيا، حين قال له ربه: أسلم. قال: أسلمت لرب العالمين. وإنما معنى الكلام: ولقد اصطفيناه في الدنيا حين قلنا له: أسلم. قال: أسلمت لرب العالمين. فأظهر اسم"الله" في قوله:"إذ قال له ربه أسلم"، على وجه الخبر عن غائب، وقد جرى ذكره قبل على وجه الخبر عن نفسه، كما قال خُفاف بن ندبة:

أقول له - والرمح يأطر متنه: ... تأمل خفافا إنني أنا ذالكا [[سلف تخريج هذا البيت في ١: ٢٢٧/ ٢: ٣٠٤.]]

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ءفإن قال لنا قائل: وهل دعا اللهُ إبراهيمَ إلى الإسلام؟

قيل له: نعم، قد دعاه إليه.

فإن قال: وفي أي حال دعاه إليه؟

قيل حين قال: ﴿يَا قَوْمِ إِنِّي بَرِيءٌ مِمَّا تُشْرِكُونَ إِنِّي وَجَّهْتُ وَجْهِيَ لِلَّذِي فَطَرَ السَّمَاوَاتِ وَالأرْضَ حَنِيفًا وَمَا أَنَا مِنَ الْمُشْرِكِينَ﴾ [سورة الأنعام: ٧٨-٧٩] ، وذلك هو الوقت الذي قال له ربه: أسلم - من بعد ما امتحنه بالكواكب والقمر والشمس. [[قرأ الآيات من سورة الأنعام: ٧٤-٧٨.]]