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Tafsīr aṭ-Ṭabarī · An-Nahl
सूरह 16

An-Nahl

جامع البيان في تأويل آي القرآن

यह एक शास्त्रीय तफ़सीर का अरबी पाठ है, जैसा Quranic Universal Library (QUL, Tarteel की) में है, QUL के डेटा की उस खुली प्रति से लिया गया जो spa5k/tafsir_api रखता है। QUL यह नहीं बताती कि वह किस छपे संस्करण का अनुसरण करती है और पाठों के लिए कोई लाइसेंस नहीं बताती, इसलिए उन्हें दिखाने का अधिकार सत्यापित नहीं है। किसी ने इसे छपी किताब या पांडुलिपि से नहीं मिलाया है और किसी आलिम ने इसकी समीक्षा नहीं की है। हर अंश उन आयतों के पास है जिन पर वह टिप्पणी करता है; वे आयतें Tanzil का क़ुरआनी पाठ हैं, जैसा वहाँ है। जहाँ पाठ में संपादक की कोई टिप्पणी दोहरे कोष्ठक में है, वहाँ वह जैसी है वैसी दिखाई गई है। अभी कोई अनुवाद नहीं है।

पाठ का स्रोत:Quranic Universal Libraryspa5k/tafsir_apiMIT2026-10-21 को लिया गया

आयत 64

وَمَآ أَنزَلْنَا عَلَيْكَ ٱلْكِتَـٰبَ إِلَّا لِتُبَيِّنَ لَهُمُ ٱلَّذِى ٱخْتَلَفُوا۟ فِيهِ ۙ وَهُدًى وَرَحْمَةً لِّقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ 64

القول في تأويل قوله تعالى: ﴿وَمَا أَنزلْنَا عَلَيْكَ الْكِتَابَ إِلا لِتُبَيِّنَ لَهُمُ الَّذِي اخْتَلَفُوا فِيهِ وَهُدًى وَرَحْمَةً لِقَوْمٍ يُؤْمِنُونُ (٦٤) ﴾

يقول تعالى ذكره لنبيه ﷺ: وما أنزلنا يا محمد عليك كتابنا وبعثناك رسولا إلى خلقنا إلا لتبين لهم ما اختلفوا فيه من دين الله، فتعرّفهم الصواب منه، والحقّ من الباطل، وتقيم عليهم بالصواب منه حجة الله الذي بعثك بها.

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وقوله ﴿وَهُدًى وَرَحْمَةٌ لِقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ﴾

يقول: وهدى بيانا من الضلالة، يعني بذلك الكتاب، ورحمة لقوم يؤمنون به، فيصدّقون بما فيه، ويقرّون بما تضمن من أمر الله ونهيه، ويعملون به، وعطف بالهدى على موضع ليبين، لأن موضعها نصب. وإنما معنى الكلام: وما أنزلنا عليك الكتاب إلا بيانًا للناس فيما اختلفوا فيه هدى ورحمة.