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Tafsīr aṭ-Ṭabarī · An-Nahl
सूरह 16

An-Nahl

جامع البيان في تأويل آي القرآن

यह एक शास्त्रीय तफ़सीर का अरबी पाठ है, जैसा Quranic Universal Library (QUL, Tarteel की) में है, QUL के डेटा की उस खुली प्रति से लिया गया जो spa5k/tafsir_api रखता है। QUL यह नहीं बताती कि वह किस छपे संस्करण का अनुसरण करती है और पाठों के लिए कोई लाइसेंस नहीं बताती, इसलिए उन्हें दिखाने का अधिकार सत्यापित नहीं है। किसी ने इसे छपी किताब या पांडुलिपि से नहीं मिलाया है और किसी आलिम ने इसकी समीक्षा नहीं की है। हर अंश उन आयतों के पास है जिन पर वह टिप्पणी करता है; वे आयतें Tanzil का क़ुरआनी पाठ हैं, जैसा वहाँ है। जहाँ पाठ में संपादक की कोई टिप्पणी दोहरे कोष्ठक में है, वहाँ वह जैसी है वैसी दिखाई गई है। अभी कोई अनुवाद नहीं है।

पाठ का स्रोत:Quranic Universal Libraryspa5k/tafsir_apiMIT2026-10-21 को लिया गया

आयत 3

خَلَقَ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضَ بِٱلْحَقِّ ۚ تَعَـٰلَىٰ عَمَّا يُشْرِكُونَ 3

القول في تأويل قوله تعالى: ﴿خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالأَرْضَ بِالْحَقِّ تَعَالَى عَمَّا يُشْرِكُونَ (٣) ﴾

يقول تعالى ذكره معرّفا خلقه حجته عليهم في توحيده، وأنه لا تصلح الألوهة إلا له: خلق ربكم أيها الناس السموات والأرض بالعدل وهو الحقّ منفردا بخلقها لم يشركه في إنشائها وإحداثها شريك ولم يعنه عليه معين، فأنى يكون له شريك ﴿تَعَالَى عَمَّا يُشْرِكُونَ﴾ يقول جلّ ثناؤه: علا ربكم أيها القوم عن شرككم ودعواكم إلها دونه، فارتفع عن أن يكون له مثل أو شريك أو ظهير، لأنه لا يكون إلها إلا من يخلق وينشئ بقدرته مثل السموات والأرض ويبتدع الأجسام فيحدثها من غير شيء، وليس ذلك في قُدرة أحد سوى الله الواحد القَّهار الذي لا تنبغي العبادة إلا له ولا تصلح الألوهة لشيء سواه.