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Tafsīr aṭ-Ṭabarī · Yunus
सूरह 10

Yunus

جامع البيان في تأويل آي القرآن

यह एक शास्त्रीय तफ़सीर का अरबी पाठ है, जैसा Quranic Universal Library (QUL, Tarteel की) में है, QUL के डेटा की उस खुली प्रति से लिया गया जो spa5k/tafsir_api रखता है। QUL यह नहीं बताती कि वह किस छपे संस्करण का अनुसरण करती है और पाठों के लिए कोई लाइसेंस नहीं बताती, इसलिए उन्हें दिखाने का अधिकार सत्यापित नहीं है। किसी ने इसे छपी किताब या पांडुलिपि से नहीं मिलाया है और किसी आलिम ने इसकी समीक्षा नहीं की है। हर अंश उन आयतों के पास है जिन पर वह टिप्पणी करता है; वे आयतें Tanzil का क़ुरआनी पाठ हैं, जैसा वहाँ है। जहाँ पाठ में संपादक की कोई टिप्पणी दोहरे कोष्ठक में है, वहाँ वह जैसी है वैसी दिखाई गई है। अभी कोई अनुवाद नहीं है।

पाठ का स्रोत:Quranic Universal Libraryspa5k/tafsir_apiMIT2026-10-21 को लिया गया

आयत 6

إِنَّ فِى ٱخْتِلَـٰفِ ٱلَّيْلِ وَٱلنَّهَارِ وَمَا خَلَقَ ٱللَّهُ فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ لَـَٔايَـٰتٍ لِّقَوْمٍ يَتَّقُونَ 6

القول في تأويل قوله تعالى: ﴿إِنَّ فِي اخْتِلافِ اللَّيْلِ وَالنَّهَارِ وَمَا خَلَقَ اللَّهُ فِي السَّمَاوَاتِ وَالأَرْضِ لآيَاتٍ لِقَوْمٍ يَتَّقُونَ (٦) ﴾

قال أبو جعفر: يقول تعالى ذكره، منبِّهًا عبادَه على موضع الدّلالة على ربوبيته، وأنه خالق كلِّ ما دونه: إن في اعتقاب الليل النهارَ، واعتقاب النهار الليلَ،. إذا ذهب هذا جاء هذا، وإذا جاء هذا ذهب هذا، [[وتفسير " اختلاف الليل والنهار " فيما سلف ٣: ٢٧٢، ٢٧٣.]] وفيما خلق الله في السموات من الشمس والقمر والنجوم، وفي الأرض من عجائب الخلق الدالة على أن لها صانعا ليس كمثله شيء= ﴿لآيات﴾ ، يقول: لأدلة وحججًا وأعلامًا واضحةً= ﴿لقوم يتقون﴾ الله، فيخافون وعيده ويخشون عقابه على إخلاص العبادة لربهم.

فإن قال قائل: أوَ لا دلالة فيما خلق الله في السموات والأرض على صانعه، إلا لمن اتقى الله؟

قيل: في ذلك الدلالة الواضحةُ على صانعه لكل من صحَّت فطرته، وبرئ من العاهات قلبه. ولم يقصد بذلك الخبرَ عن أن فيه الدلالة لمن كان قد أشعرَ نفسه تقوى الله وإنما معناه: إن في ذلك لآيات لمن اتَّقى عقاب الله، فلم يحمله هواه على خلاف ما وضحَ له من الحق، لأن ذلك يدلُّ كل ذي فطرة صحيحة على أن له مدبِّرًا يستحقّ عليه الإذعان له بالعبودة، دون ما سواه من الآلهة والأنداد.