Yunus
جامع البيان في تأويل آي القرآنयह एक शास्त्रीय तफ़सीर का अरबी पाठ है, जैसा Quranic Universal Library (QUL, Tarteel की) में है, QUL के डेटा की उस खुली प्रति से लिया गया जो spa5k/tafsir_api रखता है। QUL यह नहीं बताती कि वह किस छपे संस्करण का अनुसरण करती है और पाठों के लिए कोई लाइसेंस नहीं बताती, इसलिए उन्हें दिखाने का अधिकार सत्यापित नहीं है। किसी ने इसे छपी किताब या पांडुलिपि से नहीं मिलाया है और किसी आलिम ने इसकी समीक्षा नहीं की है। हर अंश उन आयतों के पास है जिन पर वह टिप्पणी करता है; वे आयतें Tanzil का क़ुरआनी पाठ हैं, जैसा वहाँ है। जहाँ पाठ में संपादक की कोई टिप्पणी दोहरे कोष्ठक में है, वहाँ वह जैसी है वैसी दिखाई गई है। अभी कोई अनुवाद नहीं है।
पाठ का स्रोत:Quranic Universal Libraryspa5k/tafsir_apiMIT2026-10-21 को लिया गया
وَمَا يَتَّبِعُ أَكْثَرُهُمْ إِلَّا ظَنًّا ۚ إِنَّ ٱلظَّنَّ لَا يُغْنِى مِنَ ٱلْحَقِّ شَيْـًٔا ۚ إِنَّ ٱللَّهَ عَلِيمٌۢ بِمَا يَفْعَلُونَ 36
القول في تأويل قوله تعالى: ﴿وَمَا يَتَّبِعُ أَكْثَرُهُمْ إِلا ظَنًّا إِنَّ الظَّنَّ لا يُغْنِي مِنَ الْحَقِّ شَيْئًا إِنَّ اللَّهَ عَلِيمٌ بِمَا يَفْعَلُونَ (٣٦) ﴾
قال أبو جعفر: يقول تعالى ذكره: وما يتبع أكثر هؤلاء المشركين إلا ظنا، يقول: إلا ما لا علم لهم بحقيقته وصحته، بل هم منه في شكٍّ وريبة [[انظر تفسير " الظن " فيما سلف من فهارس اللغة (ظنن) .]] = ﴿إن الظن لا يغني من الحق شيئًا﴾ ، يقول: إن الشك لا يغني من اليقين شيئًا، ولا يقوم في شيء مقامَه، ولا ينتفع به حيث يُحتاج إلى اليقين [[انظر تفسير " أغنى " فيما سلف ١٤: ١٧٩، تعليق: ٢، والمراجع هناك.]] = ﴿إن الله عليم بما يفعلون﴾ ، يقول تعالى ذكره: إن الله ذو علم بما يفعل هؤلاء المشركون، من اتباعهم الظن، وتكذيبهم الحق اليقين، وهو لهم بالمرصاد، حيث لا يُغني عنهم ظنّهم من الله شيئًا. [[انظر تفسير " عليم " فيما سلف من فهارس اللغة (علم) .]]