Tafsir As-Saadi
सूरह 86
At-Taariq
यह अरबी के अलावा किसी और भाषा में एक तफ़सीर है, जैसी Quranic Universal Library (QUL, Tarteel की) में है, QUL के डेटा की उस खुली प्रति से ली गई जो spa5k/tafsir_api रखता है। QUL के रिकॉर्ड में यह नहीं बताया गया कि इसे किसने लिखा या अनुवाद किया या यह किस छपे संस्करण का अनुसरण करती है, और पाठ के लिए कोई लाइसेंस नहीं बताया गया, इसलिए इसे दिखाने का अधिकार सत्यापित नहीं है। किसी ने इसे छपी किताब से नहीं मिलाया है और किसी आलिम ने इसकी समीक्षा नहीं की है। हर अंश उन आयतों के पास है जिन पर वह टिप्पणी करता है; वे आयतें Tanzil का क़ुरआनी पाठ हैं, जैसा वहाँ है। सबील ने इसमें से कुछ भी न लिखा है, न अनुवाद किया है।
पाठ का स्रोत:Quranic Universal Libraryspa5k/tafsir_apiMIT2026-10-21 को लिया गया
अंश
- आयतें 1–3وَٱلسَّمَآءِ وَٱلطَّارِقِ
- आयत 4إِن كُلُّ نَفْسٍ لَّمَّا عَلَيْهَا حَافِظٌ
- आयतें 5–7فَلْيَنظُرِ ٱلْإِنسَـٰنُ مِمَّ خُلِقَ
- आयतें 8–10إِنَّهُۥ عَلَىٰ رَجْعِهِۦ لَقَادِرٌ
- आयतें 11–12وَٱلسَّمَآءِ ذَاتِ ٱلرَّجْعِ
- आयतें 13–14إِنَّهُۥ لَقَوْلٌ فَصْلٌ
- आयतें 15–16إِنَّهُمْ يَكِيدُونَ كَيْدًا
- आयत 17فَمَهِّلِ ٱلْكَـٰفِرِينَ أَمْهِلْهُمْ رُوَيْدًۢا