Tafsir As-Saadi
सूरह 84
Al-Inshiqaaq
यह अरबी के अलावा किसी और भाषा में एक तफ़सीर है, जैसी Quranic Universal Library (QUL, Tarteel की) में है, QUL के डेटा की उस खुली प्रति से ली गई जो spa5k/tafsir_api रखता है। QUL के रिकॉर्ड में यह नहीं बताया गया कि इसे किसने लिखा या अनुवाद किया या यह किस छपे संस्करण का अनुसरण करती है, और पाठ के लिए कोई लाइसेंस नहीं बताया गया, इसलिए इसे दिखाने का अधिकार सत्यापित नहीं है। किसी ने इसे छपी किताब से नहीं मिलाया है और किसी आलिम ने इसकी समीक्षा नहीं की है। हर अंश उन आयतों के पास है जिन पर वह टिप्पणी करता है; वे आयतें Tanzil का क़ुरआनी पाठ हैं, जैसा वहाँ है। सबील ने इसमें से कुछ भी न लिखा है, न अनुवाद किया है।
पाठ का स्रोत:Quranic Universal Libraryspa5k/tafsir_apiMIT2026-10-21 को लिया गया
अंश
- आयतें 1–2إِذَا ٱلسَّمَآءُ ٱنشَقَّتْ
- आयत 3وَإِذَا ٱلْأَرْضُ مُدَّتْ
- आयतें 4–5وَأَلْقَتْ مَا فِيهَا وَتَخَلَّتْ
- आयत 6يَـٰٓأَيُّهَا ٱلْإِنسَـٰنُ إِنَّكَ كَادِحٌ إِلَىٰ رَبِّكَ كَدْحًا فَمُلَـٰقِيهِ
- आयतें 7–9فَأَمَّا مَنْ أُوتِىَ كِتَـٰبَهُۥ بِيَمِينِهِۦ
- आयतें 10–12وَأَمَّا مَنْ أُوتِىَ كِتَـٰبَهُۥ وَرَآءَ ظَهْرِهِۦ
- आयतें 13–15إِنَّهُۥ كَانَ فِىٓ أَهْلِهِۦ مَسْرُورًا
- आयतें 16–18فَلَآ أُقْسِمُ بِٱلشَّفَقِ
- आयत 19لَتَرْكَبُنَّ طَبَقًا عَن طَبَقٍ
- आयतें 20–21فَمَا لَهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ
- आयत 22بَلِ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ يُكَذِّبُونَ
- आयत 23وَٱللَّهُ أَعْلَمُ بِمَا يُوعُونَ
- आयत 24فَبَشِّرْهُم بِعَذَابٍ أَلِيمٍ
- आयत 25إِلَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ لَهُمْ أَجْرٌ غَيْرُ مَمْنُونٍۭ