Tafsir As-Saadi
सूरह 82
Al-Infitaar
यह अरबी के अलावा किसी और भाषा में एक तफ़सीर है, जैसी Quranic Universal Library (QUL, Tarteel की) में है, QUL के डेटा की उस खुली प्रति से ली गई जो spa5k/tafsir_api रखता है। QUL के रिकॉर्ड में यह नहीं बताया गया कि इसे किसने लिखा या अनुवाद किया या यह किस छपे संस्करण का अनुसरण करती है, और पाठ के लिए कोई लाइसेंस नहीं बताया गया, इसलिए इसे दिखाने का अधिकार सत्यापित नहीं है। किसी ने इसे छपी किताब से नहीं मिलाया है और किसी आलिम ने इसकी समीक्षा नहीं की है। हर अंश उन आयतों के पास है जिन पर वह टिप्पणी करता है; वे आयतें Tanzil का क़ुरआनी पाठ हैं, जैसा वहाँ है। सबील ने इसमें से कुछ भी न लिखा है, न अनुवाद किया है।
पाठ का स्रोत:Quranic Universal Libraryspa5k/tafsir_apiMIT2026-10-21 को लिया गया
अंश
- आयतें 1–2إِذَا ٱلسَّمَآءُ ٱنفَطَرَتْ
- आयतें 3–4وَإِذَا ٱلْبِحَارُ فُجِّرَتْ
- आयत 5عَلِمَتْ نَفْسٌ مَّا قَدَّمَتْ وَأَخَّرَتْ
- आयत 6يَـٰٓأَيُّهَا ٱلْإِنسَـٰنُ مَا غَرَّكَ بِرَبِّكَ ٱلْكَرِيمِ
- आयत 7ٱلَّذِى خَلَقَكَ فَسَوَّىٰكَ فَعَدَلَكَ
- आयत 8فِىٓ أَىِّ صُورَةٍ مَّا شَآءَ رَكَّبَكَ
- आयत 9كَلَّا بَلْ تُكَذِّبُونَ بِٱلدِّينِ
- आयतें 10–12وَإِنَّ عَلَيْكُمْ لَحَـٰفِظِينَ
- आयत 13إِنَّ ٱلْأَبْرَارَ لَفِى نَعِيمٍ
- आयत 14وَإِنَّ ٱلْفُجَّارَ لَفِى جَحِيمٍ
- आयतें 15–16يَصْلَوْنَهَا يَوْمَ ٱلدِّينِ
- आयतें 17–18وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا يَوْمُ ٱلدِّينِ
- आयत 19يَوْمَ لَا تَمْلِكُ نَفْسٌ لِّنَفْسٍ شَيْـًٔا ۖ وَٱلْأَمْرُ يَوْمَئِذٍ لِّلَّهِ