Ash-Shura
تيسير الكريم الرحمنयह एक शास्त्रीय तफ़सीर का अरबी पाठ है, जैसा Quranic Universal Library (QUL, Tarteel की) में है, QUL के डेटा की उस खुली प्रति से लिया गया जो spa5k/tafsir_api रखता है। QUL यह नहीं बताती कि वह किस छपे संस्करण का अनुसरण करती है और पाठों के लिए कोई लाइसेंस नहीं बताती, इसलिए उन्हें दिखाने का अधिकार सत्यापित नहीं है। किसी ने इसे छपी किताब या पांडुलिपि से नहीं मिलाया है और किसी आलिम ने इसकी समीक्षा नहीं की है। हर अंश उन आयतों के पास है जिन पर वह टिप्पणी करता है; वे आयतें Tanzil का क़ुरआनी पाठ हैं, जैसा वहाँ है। जहाँ पाठ में संपादक की कोई टिप्पणी दोहरे कोष्ठक में है, वहाँ वह जैसी है वैसी दिखाई गई है। अभी कोई अनुवाद नहीं है।
पाठ का स्रोत:Quranic Universal Libraryspa5k/tafsir_apiMIT2026-10-21 को लिया गया
وَمِنْ ءَايَـٰتِهِۦ خَلْقُ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَمَا بَثَّ فِيهِمَا مِن دَآبَّةٍ ۚ وَهُوَ عَلَىٰ جَمْعِهِمْ إِذَا يَشَآءُ قَدِيرٌ 29
{29} أي: ومن أدلَّة قدرتِهِ العظيمة وأنَّه سيُحيي الموتى بعد موتهم: {خَلۡقُ} هذه {السمواتِ والأرضِ}؛ على عِظَمِهما وسعتهما، الدالُّ على قدرته وسعة سلطانه، وما فيهما من الإتقان والإحكام دالٌّ على حكمته، وما فيهما من المنافع والمصالح دالٌّ على رحمتِهِ، وذلك يدلُّ على أنَّه المستحقُّ لأنواع العبادة كلِّها، وأنَّ إلهيَّة ما سواه باطلةٌ. {وما بثَّ فيهما}؛ أي: نشر في السماواتِ والأرض من أصناف الدوابِّ، التي جعلها الله مصالحَ ومنافعَ لعبادِهِ. {وهو على جمعهم}؛ أي: جمع الخلق بعد موتِهِم لموقفِ القيامةِ {إذا يشاءُ قديرٌ}: فقدرتُه ومشيئتُه صالحان لذلك، ويتوقَّف وقوعُه على وجود الخبر الصادق، وقد عُلم أنَّه قد تواترت أخبار المرسلين وكتبهم بوقوعه.