Aal-i-Imraan
تيسير الكريم الرحمنयह एक शास्त्रीय तफ़सीर का अरबी पाठ है, जैसा Quranic Universal Library (QUL, Tarteel की) में है, QUL के डेटा की उस खुली प्रति से लिया गया जो spa5k/tafsir_api रखता है। QUL यह नहीं बताती कि वह किस छपे संस्करण का अनुसरण करती है और पाठों के लिए कोई लाइसेंस नहीं बताती, इसलिए उन्हें दिखाने का अधिकार सत्यापित नहीं है। किसी ने इसे छपी किताब या पांडुलिपि से नहीं मिलाया है और किसी आलिम ने इसकी समीक्षा नहीं की है। हर अंश उन आयतों के पास है जिन पर वह टिप्पणी करता है; वे आयतें Tanzil का क़ुरआनी पाठ हैं, जैसा वहाँ है। जहाँ पाठ में संपादक की कोई टिप्पणी दोहरे कोष्ठक में है, वहाँ वह जैसी है वैसी दिखाई गई है। अभी कोई अनुवाद नहीं है।
पाठ का स्रोत:Quranic Universal Libraryspa5k/tafsir_apiMIT2026-10-21 को लिया गया
إِن يَنصُرْكُمُ ٱللَّهُ فَلَا غَالِبَ لَكُمْ ۖ وَإِن يَخْذُلْكُمْ فَمَن ذَا ٱلَّذِى يَنصُرُكُم مِّنۢ بَعْدِهِۦ ۗ وَعَلَى ٱللَّهِ فَلْيَتَوَكَّلِ ٱلْمُؤْمِنُونَ 160
{160} أي: إن يمددكم الله بنصره ومعونته {فلا غالب لكم}، فلو اجتمع عليكم مَنْ في أقطارها وما عندهم من العَدَد والعُدَد لأن الله لا مغالب له، وقد قهر العباد وأخذ بنواصيهم، فلا تتحرك دابة إلا بإذنه، ولا تسكن إلا بإذنه، {وإن يخذلكم} ويكلكم إلى أنفسكم {فمن ذا الذي ينصركم من بعده}، فلا بد أن تنخذلوا ولو أعانكم جميع الخلق، وفي ضمن ذلك الأمر بالاستنصار بالله والاعتماد عليه والبراءة من الحول والقوة، ولهذا قال:{وعلى الله فليتوكل المؤمنون}، تقدم المعمول يؤذن بالحصر، أي: على الله توكلوا لا على غيره، لأنه قد علم أنه هو الناصر وحده، فالاعتماد عليه توحيد محصل للمقصود، والاعتماد على غيره شرك غير نافع لصاحبه بل ضار، وفي هذه الآية الأمر بالتوكل على الله وحده، وأنه بحسب إيمان العبد يكون توكله.