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Tafsīr as-Saʿdī · Al-Anbiyaa
सूरह 21

Al-Anbiyaa

تيسير الكريم الرحمن

यह एक शास्त्रीय तफ़सीर का अरबी पाठ है, जैसा Quranic Universal Library (QUL, Tarteel की) में है, QUL के डेटा की उस खुली प्रति से लिया गया जो spa5k/tafsir_api रखता है। QUL यह नहीं बताती कि वह किस छपे संस्करण का अनुसरण करती है और पाठों के लिए कोई लाइसेंस नहीं बताती, इसलिए उन्हें दिखाने का अधिकार सत्यापित नहीं है। किसी ने इसे छपी किताब या पांडुलिपि से नहीं मिलाया है और किसी आलिम ने इसकी समीक्षा नहीं की है। हर अंश उन आयतों के पास है जिन पर वह टिप्पणी करता है; वे आयतें Tanzil का क़ुरआनी पाठ हैं, जैसा वहाँ है। जहाँ पाठ में संपादक की कोई टिप्पणी दोहरे कोष्ठक में है, वहाँ वह जैसी है वैसी दिखाई गई है। अभी कोई अनुवाद नहीं है।

पाठ का स्रोत:Quranic Universal Libraryspa5k/tafsir_apiMIT2026-10-21 को लिया गया

आयतें 16–17

وَمَا خَلَقْنَا ٱلسَّمَآءَ وَٱلْأَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَا لَـٰعِبِينَ 16 لَوْ أَرَدْنَآ أَن نَّتَّخِذَ لَهْوًا لَّٱتَّخَذْنَـٰهُ مِن لَّدُنَّآ إِن كُنَّا فَـٰعِلِينَ 17

{16} يخبر تعالى أنه ما خلق السماواتِ والأرضَ عَبَثاً ولا لَعِباً من غير فائدة، بل خلقها بالحقِّ وللحقِّ؛ ليستدلَّ بها العبادُ على أنَّه الخالق العظيم، المدبِّر الحكيم، الرحمن الرحيم، الذي له الكمالُ كلُّه والحمدُ كلُّه والعزَّةُ كلُّها، الصادق في قيله، الصادقةُ رسلُه فيما تخبر عنه، وأنه القادر على خلقِهما مع سَعَتِهِما وعِظَمِهِما، قادرٌ على إعادة الأجساد بعد موتها؛ ليجازي المحسنُ بإحسانه، والمسيء بإساءته.

{17}{لو أردۡنا أن نَتَّخِذَ لهواً}: على الفرض والتقدير المُحال؛ {لاتَّخذناه من لَدُنَّا}؛ أي: من عندنا، {إن كنَّا فاعلين}: ولم نطلِعكْم على ما فيه عبثٌ ولهوٌ؛ لأنَّ ذلك نقصٌ ومَثَلُ سَوْءٍ لا نحبُّ أن نرِيَه إياكم؛ فالسماوات والأرض اللذان بمرأى منكم على الدوام لا يمكنُ أن يكون القصدُ منهما العبثُ واللهو؛ كلُّ هذا تنزُّل مع العقول الصغيرة وإقناعها بجميع الوجوه المقنعة؛ فسبحان الحليم الرحيم الحكيم في تنزيله الأشياء منازلها.