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Tafsīr as-Saʿdī · Al-Baqara
सूरह 2

Al-Baqara

تيسير الكريم الرحمن

यह एक शास्त्रीय तफ़सीर का अरबी पाठ है, जैसा Quranic Universal Library (QUL, Tarteel की) में है, QUL के डेटा की उस खुली प्रति से लिया गया जो spa5k/tafsir_api रखता है। QUL यह नहीं बताती कि वह किस छपे संस्करण का अनुसरण करती है और पाठों के लिए कोई लाइसेंस नहीं बताती, इसलिए उन्हें दिखाने का अधिकार सत्यापित नहीं है। किसी ने इसे छपी किताब या पांडुलिपि से नहीं मिलाया है और किसी आलिम ने इसकी समीक्षा नहीं की है। हर अंश उन आयतों के पास है जिन पर वह टिप्पणी करता है; वे आयतें Tanzil का क़ुरआनी पाठ हैं, जैसा वहाँ है। जहाँ पाठ में संपादक की कोई टिप्पणी दोहरे कोष्ठक में है, वहाँ वह जैसी है वैसी दिखाई गई है। अभी कोई अनुवाद नहीं है।

पाठ का स्रोत:Quranic Universal Libraryspa5k/tafsir_apiMIT2026-10-21 को लिया गया

आयत 284

لِّلَّهِ مَا فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَمَا فِى ٱلْأَرْضِ ۗ وَإِن تُبْدُوا۟ مَا فِىٓ أَنفُسِكُمْ أَوْ تُخْفُوهُ يُحَاسِبْكُم بِهِ ٱللَّهُ ۖ فَيَغْفِرُ لِمَن يَشَآءُ وَيُعَذِّبُ مَن يَشَآءُ ۗ وَٱللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍ قَدِيرٌ 284

{284} يخبر تعالى بعموم ملكه لأهل السماء والأرض وإحاطة علمه بما

أبداه العباد وما أخفوه في أنفسهم، وأنه سيحاسبهم به {فيغفر لمن يشاء}

وهو المنيب إلى ربه الأواب إليه، {إنه كان للأوابين غفوراً}؛ {ويعذب من يشاء} وهو المصر على المعاصي في باطنه وظاهره، وهذه الآية لا

تنافي الأحاديث الواردة في العفو عما حدَّث به العبد نفسه ما لم يعمل أو يتكلم ، فتلك الخطرات التي

تتحدث بها النفوس التي لا يتصف بها العبد ولا يصمم عليها، وأما هنا فهي العزائم المصممة والأوصاف

الثابتة في النفوس، أوصاف الخير وأوصاف الشر، ولهذا قال:{ما في أنفسكم}؛ أي: استقر فيها وثبت من

العزائم والأوصاف. وأخبر أنه {على كل شيء قدير}؛ فمن تمام قدرته

محاسبة الخلائق وإيصال ما يستحقونه من الثواب والعقاب.