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Tafsir As-Saadi - Russian · Al-Ahqaf
सूरह 46

Al-Ahqaf

यह तफ़सीर अस-सअदी का एक अनुवाद है, जैसा IslamHouse.com उसे saadi.islamenc.com पर प्रकाशित करता है, उस साइट के पन्नों से लिया गया। साइट यह नहीं बताती कि इसका अनुवाद किसने किया या यह किस छपे संस्करण का अनुसरण करता है, और इसका पाठ लेने की कोई शर्तें नहीं बताती, इसलिए इसे दिखाने का अधिकार सत्यापित नहीं है। किसी ने इसे छपी किताब से नहीं मिलाया है और किसी आलिम ने इसकी समीक्षा नहीं की है। हर अंश उन आयतों के पास है जिन पर वह टिप्पणी करता है; वे आयतें Tanzil का क़ुरआनी पाठ हैं, जैसा वहाँ है; जिस आयत की साइट अपनी अलग टिप्पणी नहीं देती वह अपने से पहले के अंश के साथ रहती है, और सूची ऐसी हर आयत का नाम देती है। सबील ने इसमें से कुछ भी न लिखा है, न अनुवाद किया है।

पाठ का स्रोत:saadi.islamenc.comIslamHouse.comnone stated (the site names no licence and no terms for taking its text)2026-10-22 को लिया गया

आयत 32

وَمَن لَّا يُجِبْ دَاعِىَ ٱللَّهِ فَلَيْسَ بِمُعْجِزٍ فِى ٱلْأَرْضِ وَلَيْسَ لَهُۥ مِن دُونِهِۦٓ أَوْلِيَآءُ ۚ أُو۟لَـٰٓئِكَ فِى ضَلَـٰلٍ مُّبِينٍ 32

(32) Аллах всемогущ, и никто не способен одолеть Его либо сбежать от Него. Только Он может защитить Cвоего раба от огня Преисподней. А те, кто не понял этого, находятся в явном заблуждении. Да и кто может быть хуже грешника, который не внял проповедям посланников, был глух к их увещеваниям и надменно отвер- нулся от чудесных знамений и многочисленных доказательств?!!