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Tafsīr al-Qurṭubī
सूरह 89

Al-Fajr

الجامع لأحكام القرآن

यह एक शास्त्रीय तफ़सीर का अरबी पाठ है, जैसा Quranic Universal Library (QUL, Tarteel की) में है, QUL के डेटा की उस खुली प्रति से लिया गया जो spa5k/tafsir_api रखता है। QUL यह नहीं बताती कि वह किस छपे संस्करण का अनुसरण करती है और पाठों के लिए कोई लाइसेंस नहीं बताती, इसलिए उन्हें दिखाने का अधिकार सत्यापित नहीं है। किसी ने इसे छपी किताब या पांडुलिपि से नहीं मिलाया है और किसी आलिम ने इसकी समीक्षा नहीं की है। हर अंश उन आयतों के पास है जिन पर वह टिप्पणी करता है; वे आयतें Tanzil का क़ुरआनी पाठ हैं, जैसा वहाँ है। जहाँ पाठ में संपादक की कोई टिप्पणी दोहरे कोष्ठक में है, वहाँ वह जैसी है वैसी दिखाई गई है। अभी कोई अनुवाद नहीं है।

पाठ का स्रोत:Quranic Universal Libraryspa5k/tafsir_apiMIT2026-10-21 को लिया गया

अंश

  1. आयतें 1–2وَٱلْفَجْرِ
  2. आयत 3وَٱلشَّفْعِ وَٱلْوَتْرِ
  3. आयतें 4–5وَٱلَّيْلِ إِذَا يَسْرِ
  4. आयतें 6–7أَلَمْ تَرَ كَيْفَ فَعَلَ رَبُّكَ بِعَادٍ
  5. आयत 8ٱلَّتِى لَمْ يُخْلَقْ مِثْلُهَا فِى ٱلْبِلَـٰدِ
  6. आयत 9وَثَمُودَ ٱلَّذِينَ جَابُوا۟ ٱلصَّخْرَ بِٱلْوَادِ
  7. आयत 10وَفِرْعَوْنَ ذِى ٱلْأَوْتَادِ
  8. आयतें 11–13ٱلَّذِينَ طَغَوْا۟ فِى ٱلْبِلَـٰدِ
  9. आयत 14إِنَّ رَبَّكَ لَبِٱلْمِرْصَادِ
  10. आयतें 15–16فَأَمَّا ٱلْإِنسَـٰنُ إِذَا مَا ٱبْتَلَىٰهُ رَبُّهُۥ فَأَكْرَمَهُۥ وَنَعَّمَهُۥ فَيَقُولُ رَبِّىٓ أَكْرَمَنِ
  11. आयतें 17–20كَلَّا ۖ بَل لَّا تُكْرِمُونَ ٱلْيَتِيمَ
  12. आयत 21كَلَّآ إِذَا دُكَّتِ ٱلْأَرْضُ دَكًّا دَكًّا
  13. आयतें 22–23وَجَآءَ رَبُّكَ وَٱلْمَلَكُ صَفًّا صَفًّا
  14. आयत 24يَقُولُ يَـٰلَيْتَنِى قَدَّمْتُ لِحَيَاتِى
  15. आयतें 25–26فَيَوْمَئِذٍ لَّا يُعَذِّبُ عَذَابَهُۥٓ أَحَدٌ
  16. आयतें 27–30يَـٰٓأَيَّتُهَا ٱلنَّفْسُ ٱلْمُطْمَئِنَّةُ