Al-Haaqqa
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पाठ का स्रोत:saadi.islamenc.comIslamHouse.comnone stated (the site names no licence and no terms for taking its text)2026-10-22 को लिया गया
अंश
- आयतें 1–3ٱلْحَآقَّةُ
- आयत 4كَذَّبَتْ ثَمُودُ وَعَادٌۢ بِٱلْقَارِعَةِ
- आयत 5فَأَمَّا ثَمُودُ فَأُهْلِكُوا۟ بِٱلطَّاغِيَةِ
- आयत 6وَأَمَّا عَادٌ فَأُهْلِكُوا۟ بِرِيحٍ صَرْصَرٍ عَاتِيَةٍ
- आयत 7سَخَّرَهَا عَلَيْهِمْ سَبْعَ لَيَالٍ وَثَمَـٰنِيَةَ أَيَّامٍ حُسُومًا فَتَرَى ٱلْقَوْمَ فِيهَا صَرْعَىٰ كَأَنَّهُمْ أَعْجَازُ نَخْلٍ خَاوِيَةٍ
- आयत 8فَهَلْ تَرَىٰ لَهُم مِّنۢ بَاقِيَةٍ
- आयतें 9–10وَجَآءَ فِرْعَوْنُ وَمَن قَبْلَهُۥ وَٱلْمُؤْتَفِكَـٰتُ بِٱلْخَاطِئَةِ
- आयतें 11–12إِنَّا لَمَّا طَغَا ٱلْمَآءُ حَمَلْنَـٰكُمْ فِى ٱلْجَارِيَةِ
- आयतें 13–18فَإِذَا نُفِخَ فِى ٱلصُّورِ نَفْخَةٌ وَٰحِدَةٌ
- आयतें 19–20فَأَمَّا مَنْ أُوتِىَ كِتَـٰبَهُۥ بِيَمِينِهِۦ فَيَقُولُ هَآؤُمُ ٱقْرَءُوا۟ كِتَـٰبِيَهْ
- आयतें 21–24فَهُوَ فِى عِيشَةٍ رَّاضِيَةٍ
- आयतें 25–29وَأَمَّا مَنْ أُوتِىَ كِتَـٰبَهُۥ بِشِمَالِهِۦ فَيَقُولُ يَـٰلَيْتَنِى لَمْ أُوتَ كِتَـٰبِيَهْ
- आयतें 30–37خُذُوهُ فَغُلُّوهُ
- आयतें 38–43فَلَآ أُقْسِمُ بِمَا تُبْصِرُونَ
- आयतें 44–47وَلَوْ تَقَوَّلَ عَلَيْنَا بَعْضَ ٱلْأَقَاوِيلِ
- आयत 48وَإِنَّهُۥ لَتَذْكِرَةٌ لِّلْمُتَّقِينَ
- आयत 49وَإِنَّا لَنَعْلَمُ أَنَّ مِنكُم مُّكَذِّبِينَ
- आयत 50وَإِنَّهُۥ لَحَسْرَةٌ عَلَى ٱلْكَـٰفِرِينَ
- आयत 51وَإِنَّهُۥ لَحَقُّ ٱلْيَقِينِ
- आयत 52فَسَبِّحْ بِٱسْمِ رَبِّكَ ٱلْعَظِيمِ