Tafsir As-Saadi - Persian
सूरह 56
Al-Waaqia
यह अरबी के अलावा किसी और भाषा में एक तफ़सीर है, जैसी Quranic Universal Library (QUL, Tarteel की) में है, QUL के डेटा की उस खुली प्रति से ली गई जो spa5k/tafsir_api रखता है। QUL के रिकॉर्ड में यह नहीं बताया गया कि इसे किसने लिखा या अनुवाद किया या यह किस छपे संस्करण का अनुसरण करती है, और पाठ के लिए कोई लाइसेंस नहीं बताया गया, इसलिए इसे दिखाने का अधिकार सत्यापित नहीं है। किसी ने इसे छपी किताब से नहीं मिलाया है और किसी आलिम ने इसकी समीक्षा नहीं की है। हर अंश उन आयतों के पास है जिन पर वह टिप्पणी करता है; वे आयतें Tanzil का क़ुरआनी पाठ हैं, जैसा वहाँ है। सबील ने इसमें से कुछ भी न लिखा है, न अनुवाद किया है।
पाठ का स्रोत:Quranic Universal Libraryspa5k/tafsir_apiMIT2026-10-21 को लिया गया
अंश
- आयतें 1–26إِذَا وَقَعَتِ ٱلْوَاقِعَةُ
- आयतें 27–40وَأَصْحَـٰبُ ٱلْيَمِينِ مَآ أَصْحَـٰبُ ٱلْيَمِينِ
- आयतें 41–48وَأَصْحَـٰبُ ٱلشِّمَالِ مَآ أَصْحَـٰبُ ٱلشِّمَالِ
- आयतें 49–57قُلْ إِنَّ ٱلْأَوَّلِينَ وَٱلْـَٔاخِرِينَ
- आयतें 58–62أَفَرَءَيْتُم مَّا تُمْنُونَ
- आयतें 63–67أَفَرَءَيْتُم مَّا تَحْرُثُونَ
- आयतें 68–70أَفَرَءَيْتُمُ ٱلْمَآءَ ٱلَّذِى تَشْرَبُونَ
- आयतें 71–74أَفَرَءَيْتُمُ ٱلنَّارَ ٱلَّتِى تُورُونَ
- आयतें 75–87فَلَآ أُقْسِمُ بِمَوَٰقِعِ ٱلنُّجُومِ
- आयतें 88–96فَأَمَّآ إِن كَانَ مِنَ ٱلْمُقَرَّبِينَ