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Tafsir As-Saadi - Persian · Yaseen
सूरह 36

Yaseen

यह अरबी के अलावा किसी और भाषा में एक तफ़सीर है, जैसी Quranic Universal Library (QUL, Tarteel की) में है, QUL के डेटा की उस खुली प्रति से ली गई जो spa5k/tafsir_api रखता है। QUL के रिकॉर्ड में यह नहीं बताया गया कि इसे किसने लिखा या अनुवाद किया या यह किस छपे संस्करण का अनुसरण करती है, और पाठ के लिए कोई लाइसेंस नहीं बताया गया, इसलिए इसे दिखाने का अधिकार सत्यापित नहीं है। किसी ने इसे छपी किताब से नहीं मिलाया है और किसी आलिम ने इसकी समीक्षा नहीं की है। हर अंश उन आयतों के पास है जिन पर वह टिप्पणी करता है; वे आयतें Tanzil का क़ुरआनी पाठ हैं, जैसा वहाँ है। सबील ने इसमें से कुछ भी न लिखा है, न अनुवाद किया है।

पाठ का स्रोत:Quranic Universal Libraryspa5k/tafsir_apiMIT2026-10-21 को लिया गया

आयत 68

وَمَن نُّعَمِّرْهُ نُنَكِّسْهُ فِى ٱلْخَلْقِ ۖ أَفَلَا يَعْقِلُونَ 68

وَمَنْ نُعَمِّرْهُ نُنَكِّسْهُ فِي الْخَلْقِ أَفَلَا يَعْقِلُونَ؛ هر که را عمر دراز دهيم ، در آفرينش دگرگونش کنيم چرا تعقل نمي کنيد?

(68) خداوند متعال می‌فرماید: (﴿وَمَن نُّعَمِّرۡهُ نُنَكِّسۡهُ فِي ٱلۡخَلۡقِ﴾) و هر کس از انسان‌ها را که عمر طولانی بدهیم، خلقت او را دگرگون می‌سازیم؛ یعنی او را به حالت آغاز آفرینشش که دارای ناتوانی جسمی و ضعف عقلی بود برمی‌گردانیم.(﴿أَفَلَا يَعۡقِلُونَ﴾) آیا خرد نمی‌ورزند و نمی‌فهمند که انسان از هر جهت ناقص است، تا به عقل بیایند و عقلشان را در راه اطاعت از پروردگارشان به کار بگیرند؟!