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Tafsir Ahsanul Bayaan · Al-Anbiyaa
सूरह 21

Al-Anbiyaa

यह अरबी के अलावा किसी और भाषा में एक तफ़सीर है, जैसी Quranic Universal Library (QUL, Tarteel की) में है, QUL के डेटा की उस खुली प्रति से ली गई जो spa5k/tafsir_api रखता है। QUL के रिकॉर्ड में यह नहीं बताया गया कि इसे किसने लिखा या अनुवाद किया या यह किस छपे संस्करण का अनुसरण करती है, और पाठ के लिए कोई लाइसेंस नहीं बताया गया, इसलिए इसे दिखाने का अधिकार सत्यापित नहीं है। किसी ने इसे छपी किताब से नहीं मिलाया है और किसी आलिम ने इसकी समीक्षा नहीं की है। हर अंश उन आयतों के पास है जिन पर वह टिप्पणी करता है; वे आयतें Tanzil का क़ुरआनी पाठ हैं, जैसा वहाँ है। सबील ने इसमें से कुछ भी न लिखा है, न अनुवाद किया है।

पाठ का स्रोत:Quranic Universal Libraryspa5k/tafsir_apiMIT2026-10-21 को लिया गया

आयत 39

لَوْ يَعْلَمُ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ حِينَ لَا يَكُفُّونَ عَن وُجُوهِهِمُ ٱلنَّارَ وَلَا عَن ظُهُورِهِمْ وَلَا هُمْ يُنصَرُونَ 39

যদি অবিশ্বাসীরা সেই সময়ের কথা জানত, যখন তারা তাদের সম্মুখ ও পশ্চাৎ হতে অগ্নি প্রতিরোধ করতে পারবে না এবং তাদেরকে সাহায্য করাও হবে না (তাহলে তারা এ কথা বলত না)। [১]

[১] এখানে এর উত্তর ঊহ্য আছে। অর্থাৎ যদি এরা জানত, তাহলে আযাবের জন্য তাড়াতাড়ি করত না অথবা তারা নিশ্চিতরূপে জানত যে, কিয়ামত আসবে অথবা কুফরীর উপর অটল থাকত না বরং ঈমান আনয়ন করত।