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Tafsīr al-Baghawī · Al-Ahzaab
सूरह 33

Al-Ahzaab

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यह एक शास्त्रीय तफ़सीर का अरबी पाठ है, जैसा Quranic Universal Library (QUL, Tarteel की) में है, QUL के डेटा की उस खुली प्रति से लिया गया जो spa5k/tafsir_api रखता है। QUL यह नहीं बताती कि वह किस छपे संस्करण का अनुसरण करती है और पाठों के लिए कोई लाइसेंस नहीं बताती, इसलिए उन्हें दिखाने का अधिकार सत्यापित नहीं है। किसी ने इसे छपी किताब या पांडुलिपि से नहीं मिलाया है और किसी आलिम ने इसकी समीक्षा नहीं की है। हर अंश उन आयतों के पास है जिन पर वह टिप्पणी करता है; वे आयतें Tanzil का क़ुरआनी पाठ हैं, जैसा वहाँ है। जहाँ पाठ में संपादक की कोई टिप्पणी दोहरे कोष्ठक में है, वहाँ वह जैसी है वैसी दिखाई गई है। अभी कोई अनुवाद नहीं है।

पाठ का स्रोत:Quranic Universal Libraryspa5k/tafsir_apiMIT2026-10-21 को लिया गया

आयत 54

إِن تُبْدُوا۟ شَيْـًٔا أَوْ تُخْفُوهُ فَإِنَّ ٱللَّهَ كَانَ بِكُلِّ شَىْءٍ عَلِيمًا 54

﴿إِنْ تُبْدُوا شَيْئًا أَوْ تُخْفُوهُ فَإِنَّ اللَّهَ كَانَ بِكُلِّ شَيْءٍ عَلِيمًا﴾ نَزَلَتْ فِيمَنْ أَضْمَرَ نِكَاحَ عَائِشَةَ بَعْدَ رَسُولِ اللَّهِ ﷺ [[أخرجه ابن جرير: ٢٢ / ٤٠، وعزاه السيوطي في الدر المنثور: ٦ / ٦٤٤ للبيهقي وابن سعد.]] .

وَقِيلَ: قَالَ رَجُلٌ مِنَ الصَّحَابَةِ: مَا بَالُنَا نُمْنَعُ مِنَ الدُّخُولِ عَلَى بَنَاتِ أَعْمَامِنَا؟ فَنَزَلَتْ هَذِهِ الْآيَةُ.

وَلَمَّا نَزَلَتْ آيَةُ الْحِجَابِ قَالَ الْآبَاءُ وَالْأَبْنَاءُ وَالْأَقَارِبُ: وَنَحْنُ أَيْضًا نُكَلِّمُهُنَّ مِنْ وَرَاءِ الْحِجَابِ؟ فَأَنْزَلَ اللَّهُ: [[انظر: الطبري: ٢٢ / ٤١-٤٢.]] .