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Tafsīr al-Baghawī · Al-Anbiyaa
सूरह 21

Al-Anbiyaa

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यह एक शास्त्रीय तफ़सीर का अरबी पाठ है, जैसा Quranic Universal Library (QUL, Tarteel की) में है, QUL के डेटा की उस खुली प्रति से लिया गया जो spa5k/tafsir_api रखता है। QUL यह नहीं बताती कि वह किस छपे संस्करण का अनुसरण करती है और पाठों के लिए कोई लाइसेंस नहीं बताती, इसलिए उन्हें दिखाने का अधिकार सत्यापित नहीं है। किसी ने इसे छपी किताब या पांडुलिपि से नहीं मिलाया है और किसी आलिम ने इसकी समीक्षा नहीं की है। हर अंश उन आयतों के पास है जिन पर वह टिप्पणी करता है; वे आयतें Tanzil का क़ुरआनी पाठ हैं, जैसा वहाँ है। जहाँ पाठ में संपादक की कोई टिप्पणी दोहरे कोष्ठक में है, वहाँ वह जैसी है वैसी दिखाई गई है। अभी कोई अनुवाद नहीं है।

पाठ का स्रोत:Quranic Universal Libraryspa5k/tafsir_apiMIT2026-10-21 को लिया गया

आयतें 38–39

وَيَقُولُونَ مَتَىٰ هَـٰذَا ٱلْوَعْدُ إِن كُنتُمْ صَـٰدِقِينَ 38 لَوْ يَعْلَمُ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ حِينَ لَا يَكُفُّونَ عَن وُجُوهِهِمُ ٱلنَّارَ وَلَا عَن ظُهُورِهِمْ وَلَا هُمْ يُنصَرُونَ 39

﴿وَيَقُولُونَ مَتَى هَذَا الْوَعْدُ إِنْ كُنْتُمْ صَادِقِينَ﴾ فَقَالَ تَعَالَى: ﴿لَوْ يَعْلَمُ الَّذِينَ كَفَرُوا حِينَ لَا يَكُفُّونَ﴾ لَا يَدْفَعُونَ ﴿عَنْ وُجُوهِهِمُ النَّارَ وَلَا عَنْ ظُهُورِهِمْ﴾ قِيلَ: وَلَا عَنْ ظُهُورِهِمُ السِّيَاطَ، ﴿وَلَا هُمْ يُنْصَرُونَ﴾ يُمْنَعُونَ مِنَ الْعَذَابِ، وَجَوَابُ لَوْ فِي قَوْلِهِ: ﴿لَوْ يَعْلَمُ الَّذِينَ﴾ مَحْذُوفٌ مَعْنَاهُ: وَلَوْ عَلِمُوا لَمَا أَقَامُوا عَلَى كُفْرِهِمْ، وَلَمَا اسْتَعْجَلُوا، وَلَا قَالُوا: مَتَى هَذَا الْوَعْدُ؟ .