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Tafsīr al-Baghawī · Maryam
सूरह 19

Maryam

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यह एक शास्त्रीय तफ़सीर का अरबी पाठ है, जैसा Quranic Universal Library (QUL, Tarteel की) में है, QUL के डेटा की उस खुली प्रति से लिया गया जो spa5k/tafsir_api रखता है। QUL यह नहीं बताती कि वह किस छपे संस्करण का अनुसरण करती है और पाठों के लिए कोई लाइसेंस नहीं बताती, इसलिए उन्हें दिखाने का अधिकार सत्यापित नहीं है। किसी ने इसे छपी किताब या पांडुलिपि से नहीं मिलाया है और किसी आलिम ने इसकी समीक्षा नहीं की है। हर अंश उन आयतों के पास है जिन पर वह टिप्पणी करता है; वे आयतें Tanzil का क़ुरआनी पाठ हैं, जैसा वहाँ है। जहाँ पाठ में संपादक की कोई टिप्पणी दोहरे कोष्ठक में है, वहाँ वह जैसी है वैसी दिखाई गई है। अभी कोई अनुवाद नहीं है।

पाठ का स्रोत:Quranic Universal Libraryspa5k/tafsir_apiMIT2026-10-21 को लिया गया

आयत 65

رَّبُّ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا فَٱعْبُدْهُ وَٱصْطَبِرْ لِعِبَـٰدَتِهِۦ ۚ هَلْ تَعْلَمُ لَهُۥ سَمِيًّا 65

﴿رَبُّ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا فَاعْبُدْهُ وَاصْطَبِرْ لِعِبَادَتِهِ﴾ أَيِ: اصْبِرْ عَلَى أَمْرِهِ وَنَهْيِهِ ﴿هَلْ تَعْلَمُ لَهُ سَمِيًّا﴾ قَالَ ابْنُ عَبَّاسٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا: مَثَلًا [[انظر: الطبري: ١٦ / ١٠٦، الدر المنثور: ٥ / ٥٣١.]] .

وَقَالَ الْكَلْبِيُّ: هَلْ تَعْلَمُ أَحَدًا يُسَمَّى "اللَّهُ" غَيْرَهُ [[انظر: زاد المسير: ٥ / ٢٥١.]] ؟