(٧٥) بَابُ وَفَاءِ النَّبِيِّ - صلى الله عليه وسلم -
पाठ का स्रोत:Shamela 138Muḥammad Abū al-Hudā al-Yaʿqūbī2026-10-25 को लिया गया
عَنْ نُعَيْمِ بْنِ مَسْعُودٍ الأَشْجَعِيِّ - رضي الله عنه - قَالَ: «سَمِعْتُ رَسُولَ اللهِ - صلى الله عليه وسلم - يَقُولُ لِرَسُولَيْ مُسَيْلِمَةَ حِينَ قَرَأَ كِتَابَ مُسَيْلِمَةَ: مَا تَقُولَانِ أَنْتُمَا؟ قَالَا: نَقُولُ كَمَا قَالَ. قَالَ: أَمَا وَاللهِ لَوْلَا أَنَّ الرُّسُلَ لَا تُقْتَلُ لَضَرَبْتُ أَعْنَاقَكُمَا». حَدِيثٌ صَحِيحٌ أَخْرَجَهُ أَبُو دَاوُدَ والحَاكِمُ (٢).
(٢) قال الحاكم: هذا حديث على شرط مسلم ولم يُخَرِّجاه ووافقه الذهبي.
عَنْ حُذَيْفَةَ بْنِ اليَمَانِ - رضي الله عنهما - قَالَ: «مَا مَنَعَنِي أَنْ أَشْهَدَ بَدْرًا إِلَّا أَنِّي خَرَجْتُ أَنَا وَأَبِي حُسَيْلٌ (٣). قَالَ: فَأَخَذَنَا كُفَّارُ قُرَيْشٍ، قَالُوا: إِنَّكُمْ تُرِيدُونَ مُحَمَّدًا؟ فَقُلْنَا: مَا نُرِيدُهُ، مَا نُرِيدُ إِلَّا المَدِينَةَ. فَأَخَذُوا مِنَّا عَهْدَ اللهِ وَمِيثَاقَهُ لَنَنْصَرِفَنَّ إِلَى المَدِينَةِ وَلَا نُقَاتِلُ مَعَهُ. فَأَتَيْنَا رَسُولَ اللهِ - صلى الله عليه وسلم - فَأَخْبَرْنَاهُ الخَبَرَ، فَقَالَ: انْصَرِفَا، نَفِيْ لَهُمْ بِعَهْدِهِمْ، وَنَسْتَعِينُ اللهَ عَلَيْهِمْ». أَخْرَجَهُ مُسْلِمٌ.
(٣) حُسَيْلٌ: والدُ حُذَيفَةَ واليمانُ لقبه.
यह शैख़ मुहम्मद अबुल-हुदा अल-यअक़ूबी की शमाइल अल-हबीब अल-मुस्तफ़ा (मुअस्ससत अल-इल्म अश-शरीफ़, पहला संस्करण, २०१७) का अरबी पाठ है, जैसा शामेला की प्रति ने दिया है, पृष्ठ-दर-पृष्ठ। यह एक समकालीन लेखक की किताब है, और इसका पहला पृष्ठ सारे अधिकार लेखक के लिए सुरक्षित रखता है: सबील इसे संस्थापक के निर्णय से दिखाता है, और लेखक, प्रकाशक या शामेला से कोई अनुमति न माँगी गई है न दी गई है। किसी ने इस प्रति को छपी किताब से नहीं मिलाया है, और किसी आलिम ने इसकी समीक्षा नहीं की है। हदीसें बिना सनद के, लेखक की अपनी दरजाबंदी और स्रोतों सहित, जैसी किताब में हैं वैसी दी गई हैं; छपे पृष्ठ की पाद-टिप्पणियाँ उस अनुच्छेद के बाद हैं जो उनका क्रमांक रखता है। जो हदीस अगले छपे पृष्ठ तक चलती है वह प्रति में जैसी है वैसी दो अनुच्छेद है। प्रकाशन-विवरण का पृष्ठ और किताब की अपनी विषय-सूची छोड़ दी गई है। कोई अनुवाद नहीं है।