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Prayer

What is recited in the tashahhud and the final sitting of the prayer?

सबील लाइब्रेरी से · इल्मी जाँच अभी बाक़ी है

यहाँ हर जवाब सबील लाइब्रेरी की एक प्रविष्टि है, जो अपने हवालों के साथ लफ़्ज़-ब-लफ़्ज़ दिखाई गई है। इसे सवाल के लिए किसी ने नहीं लिखा, और किसी मशीन ने न इसे लिखा, न छोटा किया, न इसके अल्फ़ाज़ बदले: सवाल को उस प्रविष्टि से मिला दिया गया है जो उसका जवाब देती है। लाइब्रेरी की इल्मी जाँच अभी बाक़ी है। जहाँ मज़हब अलग राय रखते हैं, वहाँ प्रविष्टि हर एक की राय बताती है। अपने हालात का हुक्म जानने के लिए किसी आलिम से पूछें।

यह सवाल अभी इस भाषा में नहीं लिखा गया है। यह अंग्रेज़ी में दिखाया गया है।

ड्राफ़्ट तर्जुमा: मशीन ने अरबी और अंग्रेज़ी से तैयार किया है, और अभी तक किसी आलिम या मातृभाषी एडिटर ने इसे नहीं पढ़ा है। जहाँ कोई पंक्ति साफ़ न हो, वहाँ अंग्रेज़ी दिखाएँ और अरबी पर भरोसा करें।

αअत-तहिय्यात (तशह्हुद)
हर क़ादे में
التَّحِيَّاتُ لِلَّهِ وَالصَّلَوَاتُ وَالطَّيِّبَاتُ، السَّلَامُ عَلَيْكَ أَيُّهَا النَّبِيُّ وَرَحْمَةُ اللَّهِ وَبَرَكَاتُهُ، السَّلَامُ عَلَيْنَا وَعَلَىٰ عِبَادِ اللَّهِ الصَّالِحِينَ، أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ
अत-तहिय्यातु लिल्लाहि वस-सलवातु वत-तय्यिबात, अस-सलामु अलैक अय्युहन-नबिय्यु व रह्मतुल्लाहि व बरकातुह, अस-सलामु अलैना व अला इबादिल्लाहिस-सालिहीन, अश्हदु अन ला इलाह इल्लल्लाहु व अश्हदु अन्न मुहम्मदन अब्दुहु व रसूलुह
At-taḥiyyātu lillāhi waṣ-ṣalawātu waṭ-ṭayyibāt, as-salāmu ‘alayka ayyuhan-Nabiyyu wa raḥmatullāhi wa barakātuh, as-salāmu ‘alaynā wa ‘alā ‘ibādillāhiṣ-ṣāliḥīn, ash-hadu an lā ilāha illallāh wa ash-hadu anna Muḥammadan ‘abduhū wa Rasūluh
तमाम ताज़ीमें, नमाज़ें और पाकीज़ा चीज़ें अल्लाह के लिए हैं। ऐ नबी, आप पर सलाम हो, और अल्लाह की रहमत और उसकी बरकतें। सलाम हो हम पर और अल्लाह के नेक बंदों पर। मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, और मैं गवाही देता हूँ कि मुहम्मद उसके बंदे और उसके रसूल हैं।
बुख़ारी और मुस्लिम · सहीह — इब्न मसऊद; हनफ़ी अल्फ़ाज़। शाफ़ई/मालिकी मज़हब इब्न अब्बास और उमर के इससे मिलते-जुलते अल्फ़ाज़ इस्तेमाल करते हैं, सब मुस्तनद हैं।
βदुरूद-ए-इब्राहीमी
आख़िरी क़ादा
اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَعَلَىٰ آلِ مُحَمَّدٍ، كَمَا صَلَّيْتَ عَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ وَعَلَىٰ آلِ إِبْرَاهِيمَ، إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ. اللَّهُمَّ بَارِكْ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَعَلَىٰ آلِ مُحَمَّدٍ، كَمَا بَارَكْتَ عَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ وَعَلَىٰ آلِ إِبْرَاهِيمَ، إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ
अल्लाहुम्म सल्लि अला मुहम्मदिन व अला आलि मुहम्मद, कमा सल्लैत अला इब्राहीम व अला आलि इब्राहीम, इन्नक हमीदुन मजीद. अल्लाहुम्म बारिक अला मुहम्मदिन व अला आलि मुहम्मद, कमा बारक्त अला इब्राहीम व अला आलि इब्राहीम, इन्नक हमीदुन मजीद
Allāhumma ṣalli ‘alā Muḥammadin wa ‘alā āli Muḥammad, kamā ṣallayta ‘alā Ibrāhīma wa ‘alā āli Ibrāhīm, innaka Ḥamīdun Majīd. Allāhumma bārik ‘alā Muḥammadin wa ‘alā āli Muḥammad, kamā bārakta ‘alā Ibrāhīma wa ‘alā āli Ibrāhīm, innaka Ḥamīdun Majīd
ऐ अल्लाह, मुहम्मद पर और मुहम्मद की आल पर रहमत नाज़िल फ़रमा, जैसे तूने इब्राहीम पर और इब्राहीम की आल पर रहमत नाज़िल फ़रमाई — बेशक तू तारीफ़ के लायक़, बुज़ुर्गी वाला है। ऐ अल्लाह, मुहम्मद पर और मुहम्मद की आल पर बरकत नाज़िल फ़रमा, जैसे तूने इब्राहीम पर और इब्राहीम की आल पर बरकत नाज़िल फ़रमाई — बेशक तू तारीफ़ के लायक़, बुज़ुर्गी वाला है।
बुख़ारी और मुस्लिम · सहीह — वह जवाब जो आप ﷺ ने तब दिया जब पूछा गया कि आप पर दुरूद कैसे भेजा जाए। फिर नीचे की दो दुआएँ, फिर सलाम।
Aचार चीज़ों से पनाह
1×
اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ عَذَابِ جَهَنَّمَ، وَمِنْ عَذَابِ الْقَبْرِ، وَمِنْ فِتْنَةِ الْمَحْيَا وَالْمَمَاتِ، وَمِنْ شَرِّ فِتْنَةِ الْمَسِيحِ الدَّجَّالِ
अल्लाहुम्म इन्नी अऊज़ु बिक मिन अज़ाबि जहन्नम, व मिन अज़ाबिल-क़ब्र, व मिन फ़ित्नतिल-मह्या वल-ममात, व मिन शर्रि फ़ित्नतिल-मसीहिद-दज्जाल
Allāhumma innī a‘ūdhu bika min ‘adhābi jahannam, wa min ‘adhābil-qabr, wa min fitnatil-maḥyā wal-mamāt, wa min sharri fitnatil-Masīḥid-Dajjāl
ऐ अल्लाह, मैं तेरी पनाह माँगता हूँ जहन्नम के अज़ाब से, क़ब्र के अज़ाब से, ज़िंदगी और मौत के फ़ितने से, और मसीह दज्जाल के फ़ितने की बुराई से।
मुस्लिम · सहीह — हुक्म दिया गया: “जब तुममें से कोई आख़िरी तशह्हुद से फ़ारिग़ हो, तो चार चीज़ों से पनाह माँगे।”

बिंदीदार किनारे वाली पंक्तियाँ अरबी का तलफ़्फ़ुज़ हैं, जो उसकी हरकात से क़ायदे के मुताबिक़ बनाया गया है। ये छपी हुई किताबों से नहीं हैं और इनकी जाँच नहीं हुई है: जहाँ यह अरबी से अलग हो, वहाँ अरबी ही सही है।

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यह वह है जो लाइब्रेरी आम तौर पर कहती है। यह आपके अपने मामले का हुक्म नहीं है: उसके लिए किसी आलिम से पूछें।

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