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अज़कार

ज़रूरत के मुताबिक़ दुआ

ज़रूरत के हिसाब से तरतीब दी गई, ताकि जब आपको अल्फ़ाज़ न सूझें तो वे सामने हों।

इल्मी जाँच: अभी बाक़ी है

यह टेक्स्ट सबील की प्रिंट लाइब्रेरी से लिया गया है। इसकी इल्मी जाँच अभी जारी है; जब दो उलमा इस पर दस्तख़त कर देंगे, तब हर चीज़ के साथ उसकी जाँच करने वालों के नाम और तारीख़ दर्ज होगी।

ड्राफ़्ट तर्जुमा: मशीन ने अरबी और अंग्रेज़ी से तैयार किया है, और अभी तक किसी आलिम या मातृभाषी एडिटर ने इसे नहीं पढ़ा है। जहाँ कोई पंक्ति साफ़ न हो, वहाँ अंग्रेज़ी दिखाएँ और अरबी पर भरोसा करें।

02रब्बना · I
رَبَّنَا آتِنَا فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً وَفِي الْآخِرَةِ حَسَنَةً وَقِنَا عَذَابَ النَّارِ
रब्बना आतिना फ़िद-दुन्या हसनतन व फ़िल-आख़िरति हसनतन व क़िना अज़ाबन-नार
rabbanā ātinā fid-dunyā ḥasanatan wa fil-ākhirati ḥasanatan wa qinā ‘adhāban-nār
ऐ हमारे पालनहार! हमें दुनिया में भलाई तथा आख़िरत में भी भलाई दे और हमें आग के अज़ाब से बचा।
क़ुरआन 2:201 — वह दुआ जो आप ﷺ सबसे ज़्यादा माँगते थे।
رَبَّنَا لَا تُؤَاخِذْنَآ إِن نَّسِينَآ أَوْ أَخْطَأْنَا ۚ رَبَّنَا وَلَا تَحْمِلْ عَلَيْنَآ إِصْرًا كَمَا حَمَلْتَهُۥ عَلَى ٱلَّذِينَ مِن قَبْلِنَا ۚ رَبَّنَا وَلَا تُحَمِّلْنَا مَا لَا طَاقَةَ لَنَا بِهِۦ ۖ وَٱعْفُ عَنَّا وَٱغْفِرْ لَنَا وَٱرْحَمْنَآ ۚ أَنتَ مَوْلَىٰنَا فَٱنصُرْنَا عَلَى ٱلْقَوْمِ ٱلْكَـٰفِرِينَ
पूरी आयत

La yukallifu Allahu nafsan illa wusAAaha laha ma kasabat waAAalayha ma iktasabat rabbana la tuakhithna in naseena aw akhtana rabbana wala tahmil AAalayna isran kama hamaltahu AAala allatheena min qablina rabbana wala tuhammilna ma la taqata lana bihi waoAAfu AAanna waighfir lana wairhamna anta mawlana faonsurna AAala alqawmi alkafireena

अल्लाह किसी प्राणी पर भार नहीं डालता परंतु उसकी क्षमता के अनुसार। उसी के लिए है जो उसने (नेकी) कमाई और उसी पर है जो उसने (पाप) कमाया। ऐ हमारे पालनहार! हमारी पकड़ न कर यदि हम भूल जाएँ या हमसे चूक हो जाए। ऐ हमारे पालनहार! और हमपर कोई भारी बोझ न डाल, जैसे तूने उसे उन लोगों पर डाला जो हमसे पहले थे। ऐ हमारे पालनहार! और हमसे वह चीज़ न उठवा जिस (के उठाने) की हम में शक्ति न हो। तथा हमें माफ़ कर और हमें क्षमा कर दे और हमपर दया कर। तू ही हमारा स्वामी (संरक्षक) है, इसलिए काफ़िरों के मुक़ाबले में हमारी मदद कर।

मतलब: Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari · QuranEnc.com · version 1.1.5। तलफ़्फ़ुज़ वही है जो तनज़ील जारी करता है। सबील ने दोनों में से किसी की समीक्षा नहीं की है।

पूरा पाठ दिखाया गया है, क़ुरआन 2:286 से। छपे संस्करण में यह छोटा है। नीचे की पंक्तियाँ छपे संस्करण की हैं, जो छोटे पाठ के लिए लिखी गई थीं।

rabbanā lā tu’ākhidhnā in nasīnā aw akhṭa’nā
ऐ हमारे पालनहार! हमारी पकड़ न कर यदि हम भूल जाएँ या हमसे चूक हो जाए।
क़ुरआन 2:286 — सूरह अल-बक़रह के आख़िरी अल्फ़ाज़।
03रब्बना · II
رَبَّنَا لَا تُزِغْ قُلُوبَنَا بَعْدَ إِذْ هَدَيْتَنَا وَهَبْ لَنَا مِن لَّدُنكَ رَحْمَةً ۚ إِنَّكَ أَنتَ ٱلْوَهَّابُ
पूरी आयत

Rabbana la tuzigh quloobana baAAda ith hadaytana wahab lana min ladunka rahmatan innaka anta alwahhabu

(तथा वे कहते हैं :) ऐ हमारे पालनहार! हमें हिदायत देने के बाद हमारे दिलों को टेढ़ा न कर, और हमें अपनी ओर से दया प्रदान कर। निःसंदेह तू ही बहुत बड़ा दाता है।

मतलब: Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari · QuranEnc.com · version 1.1.5। तलफ़्फ़ुज़ वही है जो तनज़ील जारी करता है। सबील ने दोनों में से किसी की समीक्षा नहीं की है।

पूरा पाठ दिखाया गया है, क़ुरआन 3:8 से। छपे संस्करण में यह छोटा है। नीचे की पंक्तियाँ छपे संस्करण की हैं, जो छोटे पाठ के लिए लिखी गई थीं।

rabbanā lā tuzigh qulūbanā ba‘da idh hadaytanā wa hab lanā mil-ladunka raḥmah
ऐ हमारे पालनहार! हमें हिदायत देने के बाद हमारे दिलों को टेढ़ा न कर, और हमें अपनी ओर से दया प्रदान कर।
क़ुरआन 3:8
رَبَّنَآ أَفْرِغْ عَلَيْنَا صَبْرًا وَثَبِّتْ أَقْدَامَنَا وَٱنصُرْنَا عَلَى ٱلْقَوْمِ ٱلْكَـٰفِرِينَ
पूरी आयत

Walamma barazoo lijaloota wajunoodihi qaloo rabbana afrigh AAalayna sabran wathabbit aqdamana waonsurna AAala alqawmi alkafireena

और जब वे जालूत और उसकी सेनाओं के सामने हुए, तो दुआ की : ऐ हमारे पालनहार! हमपर धैर्य उँडेल दे तथा हमारे पैरों को जमा दे और इन काफ़िरों के विरुद्ध हमारी सहायता कर।

मतलब: Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari · QuranEnc.com · version 1.1.5। तलफ़्फ़ुज़ वही है जो तनज़ील जारी करता है। सबील ने दोनों में से किसी की समीक्षा नहीं की है।

पूरा पाठ दिखाया गया है, क़ुरआन 2:250 से। छपे संस्करण में यह छोटा है। नीचे की पंक्तियाँ छपे संस्करण की हैं, जो छोटे पाठ के लिए लिखी गई थीं।

rabbanā afrigh ‘alaynā ṣabran wa thabbit aqdāmanā
ऐ हमारे पालनहार! हमपर धैर्य उँडेल दे तथा हमारे पैरों को जमा दे
क़ुरआन 2:250 — यह तालूत के थोड़े-से साथियों ने उस जंग से पहले कहा था जिसमें उनके हार जाने की उम्मीद की जा रही थी।
04रब्बना · III
رَبَّنَا ظَلَمْنَا أَنْفُسَنَا وَإِنْ لَمْ تَغْفِرْ لَنَا وَتَرْحَمْنَا لَنَكُونَنَّ مِنَ الْخَاسِرِينَ
रब्बना ज़लम्ना अन्फ़ुसना व इन लम तग़्फ़िर लना व तर्हम्ना लनकूनन्न मिनल-ख़ासिरीन
rabbanā ẓalamnā anfusanā wa il lam taghfir lanā wa tarḥamnā lanakūnanna minal-khāsirīn
ऐ हमारे पालनहार! हमने अपने आपपर अत्याचार किया है। और यदि तूने हमें क्षमा न किया तथा हमपर दया न की, तो निश्चय हम अवश्य घाटा उठाने वालों में से हो जाएँगे।
क़ुरआन 7:23 — आदम के अल्फ़ाज़।
رَبِّ اشْرَحْ لِي صَدْرِي وَيَسِّرْ لِي أَمْرِي وَاحْلُلْ عُقْدَةً مِنْ لِسَانِي يَفْقَهُوا قَوْلِي
रब्बि-श्रह ली सद्री व यस्सिर ली अम्री व-ह्लुल उक़्दतन मिन लिसानी यफ़्क़हू क़ौली
rabbi-shraḥ lī ṣadrī wa yassir lī amrī waḥlul ‘uqdatan min lisānī yafqahū qawlī
ऐ मेरे पालनहार! मेरे लिए मेरा सीना खोल दे। तथा मेरे लिए मेरा काम सरल कर दे। और मेरी ज़बान की गाँठ खोल दे। ताकि वे मेरी बात समझ लें।
क़ुरआन 20:25–28 — मूसा, फ़िरऔन से बात करने से पहले। हर मुश्किल बातचीत के लिए।
05जामे दुआएँ · I
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْهُدَىٰ وَالتُّقَىٰ وَالْعَفَافَ وَالْغِنَىٰ
अल्लाहुम्म इन्नी असअलुकल-हुदा वत-तुक़ा वल-अफ़ाफ़ वल-ग़िना
allāhumma innī as’alukal-hudā wat-tuqā wal-‘afāfa wal-ghinā
ऐ अल्लाह, मैं तुझसे हिदायत, तक़वा, पाकदामनी और बेनियाज़ी माँगता हूँ।
मुस्लिम · सहीह — चार लफ़्ज़ जो पूरी ज़िंदगी को समेट लेते हैं।
رَبِّ زِدْنِي عِلْمًا
रब्बि ज़िद्नी इल्मन
rabbi zidnī ‘ilmā
ऐ मेरे पालनहार! मुझे ज्ञान में बढ़ा दे।
क़ुरआन 20:114 — वह अकेली चीज़ जिसे और ज़्यादा माँगने का हुक्म अल्लाह ने अपने रसूल को दिया।
حَسْبُنَا اللَّهُ وَنِعْمَ الْوَكِيلُ
हस्बुनल्लाहु व निअमल-वकील
ḥasbunallāhu wa ni‘mal-wakīl
हमारे लिए अल्लाह काफ़ी है और वह बहुत अच्छा कार्यसाधक (काम बनाने वाला) है।
क़ुरआन 3:173 — यह इब्राहीम ने आग में कहा, और ईमान वालों ने तब कहा जब लश्कर इकट्ठे हो गए।
06जामे दुआएँ · II
اللَّهُمَّ أَصْلِحْ لِي دِينِيَ الَّذِي هُوَ عِصْمَةُ أَمْرِي وَأَصْلِحْ لِي دُنْيَاىَ الَّتِي فِيهَا مَعَاشِي وَأَصْلِحْ لِي آخِرَتِي الَّتِي فِيهَا مَعَادِي وَاجْعَلِ الْحَيَاةَ زِيَادَةً لِي فِي كُلِّ خَيْرٍ وَاجْعَلِ الْمَوْتَ رَاحَةً لِي مِنْ كُلِّ شَرٍّ
अल्लाहुम्म अस्लिह ली दीनियल-लज़ी हुव इस्मतु अम्री व अस्लिह ली दुन्यायल-लती फ़ीहा मआशी व अस्लिह ली आख़िरतिल-लती फ़ीहा मआदी व-जअलिल-हयात ज़ियादतन ली फ़ी कुल्लि ख़ैरिन व-जअलिल-मौत राहतन ली मिन कुल्लि शर्र
पूरी रिवायत

Abu Huraira reported that Allah's Messenger (ﷺ) used to supplicate (in these words):" O Allah, set right for me my religion which is the safeguard of my affairs. And set right for me the affairs of my world wherein is my living. And set right for me my Hereafter on which depends my after-life. And make the life for me (a source) of abundance for every good and make my death a source of comfort for me protecting me against every evil

अनुवाद खुले डेटासेट का अपना है, जैसा है वैसा दिखाया गया है: अनुवादक का नाम नहीं है, इसके अधिकार सत्यापित नहीं हैं, और किसी ने इसे अरबी से नहीं मिलाया है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

पूरा पाठ दिखाया गया है, सहीह मुस्लिम · नंबर 6903 से। छपे संस्करण में यह छोटा है। नीचे की पंक्तियाँ छपे संस्करण की हैं, जो छोटे पाठ के लिए लिखी गई थीं।

allāhumma aṣliḥ lī dīniyalladhī huwa ‘iṣmatu amrī, wa aṣliḥ lī dunyāyallatī fīhā ma‘āshī, wa aṣliḥ lī ākhiratiyallatī fīhā ma‘ādī
ऐ अल्लाह, मेरे दीन को सँवार दे, जो मेरे मामले की हिफ़ाज़त है; मेरी दुनिया को सँवार दे, जिसमें मेरी रोज़ी है; और मेरी आख़िरत को सँवार दे, जिसकी तरफ़ मुझे लौटना है। ज़िंदगी को हर भलाई में इज़ाफ़ा बना, और मौत को हर बुराई से राहत।
मुस्लिम · सहीह
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ مِنَ الْخَيْرِ كُلِّهِ عَاجِلِهِ وَآجِلِهِ مَا عَلِمْتُ مِنْهُ وَمَا لَمْ أَعْلَمْ وَأَعُوذُ بِكَ مِنَ الشَّرِّ كُلِّهِ عَاجِلِهِ وَآجِلِهِ مَا عَلِمْتُ مِنْهُ وَمَا لَمْ أَعْلَمْ اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ مِنْ خَيْرِ مَا سَأَلَكَ عَبْدُكَ وَنَبِيُّكَ وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ مَا عَاذَ بِهِ عَبْدُكَ وَنَبِيُّكَ اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْجَنَّةَ وَمَا قَرَّبَ إِلَيْهَا مِنْ قَوْلٍ أَوْ عَمَلٍ وَأَعُوذُ بِكَ مِنَ النَّارِ وَمَا قَرَّبَ إِلَيْهَا مِنْ قَوْلٍ أَوْ عَمَلٍ وَأَسْأَلُكَ أَنْ تَجْعَلَ كُلَّ قَضَاءٍ قَضَيْتَهُ لِي خَيْرًا
अल्लाहुम्म इन्नी असअलुक मिनल-ख़ैरि कुल्लिहि आजिलिहि व आजिलिहि मा अलिम्तु मिन्हु व मा लम अअलम व अऊज़ु बिक मिनश-शर्रि कुल्लिहि आजिलिहि व आजिलिहि मा अलिम्तु मिन्हु व मा लम अअलम अल्लाहुम्म इन्नी असअलुक मिन ख़ैरि मा सअलक अब्दुक व नबिय्युक व अऊज़ु बिक मिन शर्रि मा आज़ बिहि अब्दुक व नबिय्युक अल्लाहुम्म इन्नी असअलुकल-जन्नत व मा क़र्रब इलैहा मिन क़ौलिन औ अमलिन व अऊज़ु बिक मिनन-नारि व मा क़र्रब इलैहा मिन क़ौलिन औ अमलिन व असअलुक अन तजअल कुल्ल क़ज़ाइन क़ज़ैतहु ली ख़ैरन
पूरी रिवायत

It was narrated from 'Aishah that :the Messenger of Allah (saas) taught her this supplication: "Allahumma inni as'aluka minal-khayri kullihi, 'ajilihi wa ajilihi, ma 'alimtu minhu wa ma la a'lam. Wa a'udhu bika minash-sharri kullihi, 'ajilihi wa ajilihi, ma 'alimtu minhu wa ma la a'lam. Allahumma inni as'aluka min khayri ma sa'alaka 'abduka wa nabiyyuka, wa a'udhu bika min sharri ma 'adha bihi 'abduka wa nabiyyuka. Allahumma inni as'alukal-jannatah wa ma qarrab ilayha min qawlin aw 'amalin, wa a'udhu bika minan-nari wa ma qarraba ilayha min qawlin aw 'amalin, wa as'aluka an taj'al kulla qada'in qadaytahuli khayran (O Allah, I ask You for all that is good, in this world and in the Hereafter, what I know and what I do not know. O Allah, I seek refuge with You from all evil, in this world and in the Hereafter, what I know and what I do not know. O Allah, I ask You for the good that Your slave and Prophet has asked You for, and I seek refuge with You from the evil from which Your slave and Prophet sought refuge. O Allah, I ask You for Paradise and for that which brings one closer to it, in word and deed, and I seek refuge in You from Hell and from that which brings one closer to it, in word and deed. And I ask You to make every decree that You decree concerning me good)

अनुवाद खुले डेटासेट का अपना है, जैसा है वैसा दिखाया गया है: अनुवादक का नाम नहीं है, इसके अधिकार सत्यापित नहीं हैं, और किसी ने इसे अरबी से नहीं मिलाया है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

पूरा पाठ दिखाया गया है, सुनन इब्न माजा · नंबर 3846 से। छपे संस्करण में यह छोटा है। नीचे की पंक्तियाँ छपे संस्करण की हैं, जो छोटे पाठ के लिए लिखी गई थीं।

allāhumma innī as’aluka minal-khayri kullihi ‘ājilihi wa ājilihi, mā ‘alimtu minhu wa mā lam a‘lam
ऐ अल्लाह, मैं तुझसे हर भलाई माँगता हूँ, जल्द मिलने वाली भी और देर से मिलने वाली भी, जो मैं जानता हूँ वह भी और जो नहीं जानता वह भी — और मैं हर बुराई से तेरी पनाह माँगता हूँ, इसी तरह।
इब्न माजा · सहीह — आइशा को ऐसी दुआ के तौर पर सिखाई गई जो कुछ भी नहीं छोड़ती।
07परेशानी और ग़म · I
لَا إِلَٰهَ إِلَّا أَنْتَ سُبْحَانَكَ إِنِّي كُنْتُ مِنَ الظَّالِمِينَ
ला इलाह इल्ला अन्त सुब्हानक इन्नी कुन्तु मिनज़-ज़ालिमीन
lā ilāha illā anta subḥānaka innī kuntu minaẓ-ẓālimīn
तेरे सिवा कोई पूज्य नहीं, तू पवित्र है। निश्चय मैं ही अत्याचारियों में हो गया।
क़ुरआन 21:87 — अंधेरों में से यूनुस की पुकार। “जो भी मुसलमान इसके साथ किसी चीज़ के लिए दुआ करता है, अल्लाह उसकी दुआ ज़रूर क़बूल करता है।” तिर्मिज़ी · सहीह
اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْهَمِّ وَالْحَزَنِ، وَالْعَجْزِ وَالْكَسَلِ، وَالْجُبْنِ وَالْبُخْلِ، وَضَلَعِ الدَّيْنِ وَغَلَبَةِ الرِّجَالِ
अल्लाहुम्म इन्नी अऊज़ु बिक मिनल-हम्मि वल-हज़न, वल-अज्ज़ि वल-कसल, वल-जुब्नि वल-बुख़्ल, व ज़लइद-दैनि व ग़लबतिर-रिजाल
allāhumma innī a‘ūdhu bika minal-hammi wal-ḥazan, wal-‘ajzi wal-kasal, wal-jubni wal-bukhl, wa ḍala‘id-dayni wa ghalabatir-rijāl
ऐ अल्लाह, मैं तेरी पनाह माँगता हूँ फ़िक्र और ग़म से, आजिज़ी और सुस्ती से, बुज़दिली और कंजूसी से, क़र्ज़ के बोझ से और लोगों के ग़लबे से।
बुख़ारी · सहीह
08परेशानी और ग़म · II
يَا حَيُّ يَا قَيُّومُ بِرَحْمَتِكَ أَسْتَغِيثُ، أَصْلِحْ لِي شَأْنِي كُلَّهُ وَلَا تَكِلْنِي إِلَىٰ نَفْسِي طَرْفَةَ عَيْنٍ
या हय्यु या क़य्यूमु बिरह्मतिक अस्तग़ीस, अस्लिह ली शअनी कुल्लहु व ला तकिल्नी इला नफ़्सी तर्फ़त ऐन
yā ḥayyu yā qayyūmu bi-raḥmatika astaghīth, aṣliḥ lī sha’nī kullahu wa lā takilnī ilā nafsī ṭarfata ‘ayn
ऐ हमेशा ज़िंदा रहने वाले, ऐ सबको क़ायम रखने वाले, मैं तेरी रहमत के वसीले से फ़रियाद करता हूँ। मेरे सारे मामले सँवार दे, और मुझे पलक झपकने भर के लिए भी मेरे नफ़्स के हवाले न कर।
नसाई, अमलुल-यौमि वल-लैला में · हसन
एक नोट
जब ग़म आपके अल्फ़ाज़ छीन ले, तो यही अल्फ़ाज़ बन जाते हैं। अगर ये आपको याद न हों, तो इन्हें देखकर पढ़ लें — पढ़ना भी दुआ है।
09सय्यिदुल-इस्तिग़फ़ार
اللَّهُمَّ أَنْتَ رَبِّي لَا إِلَٰهَ إِلَّا أَنْتَ، خَلَقْتَنِي وَأَنَا عَبْدُكَ، وَأَنَا عَلَىٰ عَهْدِكَ وَوَعْدِكَ مَا اسْتَطَعْتُ، أَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ مَا صَنَعْتُ، أَبُوءُ لَكَ بِنِعْمَتِكَ عَلَيَّ وَأَبُوءُ لَكَ بِذَنْبِي فَاغْفِرْ لِي فَإِنَّهُ لَا يَغْفِرُ الذُّنُوبَ إِلَّا أَنْتَ
अल्लाहुम्म अन्त रब्बी ला इलाह इल्ला अन्त, ख़लक़्तनी व अना अब्दुक, व अना अला अह्दिक व वअदिक म-स्ततअत, अऊज़ु बिक मिन शर्रि मा सनअत, अबूउ लक बिनिअमतिक अलय्य व अबूउ लक बिज़न्बी फ़-ग़्फ़िर ली फ़-इन्नहु ला यग़्फ़िरुज़-ज़ुनूब इल्ला अन्त
allāhumma anta rabbī lā ilāha illā ant, khalaqtanī wa anā ‘abduk, wa anā ‘alā ‘ahdika wa wa‘dika mastaṭa‘t, a‘ūdhu bika min sharri mā ṣana‘t, abū’u laka bi-ni‘matika ‘alayya wa abū’u laka bi-dhanbī faghfir lī fa-innahu lā yaghfirudh-dhunūba illā ant
ऐ अल्लाह, तू मेरा रब है; तेरे सिवा कोई माबूद नहीं। तूने मुझे पैदा किया और मैं तेरा बंदा हूँ, और जितनी मुझमें ताक़त है, मैं तेरे अहद और वादे पर क़ायम हूँ। मैं अपने किए की बुराई से तेरी पनाह माँगता हूँ। मैं अपने ऊपर तेरी नेमत का इक़रार करता हूँ और अपने गुनाह का इक़रार करता हूँ — तो मुझे बख़्श दे, क्योंकि तेरे सिवा कोई गुनाहों को नहीं बख़्शता।
बुख़ारी · सहीह — जो इसे सुबह यक़ीन के साथ कहे और उसी दिन मर जाए, वह जन्नत में दाख़िल होता है; और इसी तरह रात में।
10मग़फ़िरत, मुख़्तसर में
أَسْتَغْفِرُ اللَّهَ وَأَتُوبُ إِلَيْهِ
अस्तग़्फ़िरुल्लाह व अतूबु इलैह
astaghfirullāha wa atūbu ilayh
मैं अल्लाह से मग़फ़िरत माँगता हूँ और उसी की तरफ़ तौबा करता हूँ।
बुख़ारी · सहीह — आप ﷺ इसे दिन में सत्तर से ज़्यादा बार कहते थे, हालाँकि आपको पहले ही बख़्श दिया गया था।
اللَّهُمَّ اكْفِنِي بِحَلَالِكَ عَنْ حَرَامِكَ، وَأَغْنِنِي بِفَضْلِكَ عَمَّنْ سِوَاكَ
अल्लाहुम्म-क्फ़िनी बिहलालिक अन हरामिक, व अग़्निनी बिफ़ज़्लिक अम्मन सिवाक
allāhumma-kfinī bi-ḥalālika ‘an ḥarāmik, wa aghninī bi-faḍlika ‘amman siwāk
ऐ अल्लाह, अपने हलाल के ज़रिए मुझे अपने हराम से काफ़ी हो जा, और अपने फ़ज़्ल से मुझे अपने सिवा हर एक से बेनियाज़ कर दे।
तिर्मिज़ी · हसन — क़र्ज़ के बोझ तले दबे एक शख़्स को सिखाई गई।
11घर-परिवार
رَبَّنَا هَبْ لَنَا مِنْ أَزْوَاجِنَا وَذُرِّيَّاتِنَا قُرَّةَ أَعْيُنٍ وَاجْعَلْنَا لِلْمُتَّقِينَ إِمَامًا
रब्बना हब लना मिन अज़्वाजिना व ज़ुर्रिय्यातिना क़ुर्रत अअयुनिन व-जअल्ना लिल-मुत्तक़ीन इमामन
rabbanā hab lanā min azwājinā wa dhurriyyātinā qurrata a‘yunin wa-j‘alnā lil-muttaqīna imāmā
ऐ हमारे पालनहार! हमें हमारी पत्नियों तथा संतानों से आँखों की ठंडक प्रदान कर और हमें परहेज़गारों का 'इमाम' बना दे।
क़ुरआन 25:74
رَبِّ اجْعَلْنِي مُقِيمَ الصَّلَاةِ وَمِنْ ذُرِّيَّتِي، رَبَّنَا وَتَقَبَّلْ دُعَاءِ
रब्बि-जअल्नी मुक़ीमस-सलाति व मिन ज़ुर्रिय्यती, रब्बना व तक़ब्बल दुआअ
rabbi-j‘alnī muqīmaṣ-ṣalāti wa min dhurriyyatī, rabbanā wa taqabbal du‘ā’
मेरे पालनहार! मुझे नमाज़ क़ायम करने वाला बना तथा मेरी संतान में से भी। ऐ हमारे पालनहार! और मेरी दुआ स्वीकार कर।
क़ुरआन 14:40 — इब्राहीम, बुढ़ापे में।
12रोज़ी और काम
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ عِلْمًا نَافِعًا، وَرِزْقًا طَيِّبًا، وَعَمَلًا مُتَقَبَّلًا
अल्लाहुम्म इन्नी असअलुक इल्मन नाफ़िअन, व रिज़्क़न तय्यिबन, व अमलन मुतक़ब्बलन
allāhumma innī as’aluka ‘ilman nāfi‘ā, wa rizqan ṭayyibā, wa ‘amalan mutaqabbalā
ऐ अल्लाह, मैं तुझसे नफ़ा देने वाला इल्म, पाकीज़ा रोज़ी और क़बूल होने वाला अमल माँगता हूँ।
इब्न माजा · सहीह — फ़ज्र की नमाज़ के बाद कही जाती है।
एक नोट
रोज़ी माँगने से पहले, हलाल रोज़ी माँगना सीखें। ज़्यादा नहीं — पाकीज़ा। दुआ की भाषा जो भी हो, नीयत साफ़ रहे।
13हिफ़ाज़त
أَعُوذُ بِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّاتِ مِنْ شَرِّ مَا خَلَقَ
अऊज़ु बिकलिमातिल्लाहित-ताम्माति मिन शर्रि मा ख़लक़
a‘ūdhu bi-kalimātillāhit-tāmmāti min sharri mā khalaq
मैं अल्लाह के कामिल कलिमात की पनाह लेता हूँ, उस चीज़ की बुराई से जो उसने पैदा की।
मुस्लिम · सहीह — शाम होने पर तीन बार; उसे कोई चीज़ नुक़सान नहीं पहुँचाएगी।
بِسْمِ اللَّهِ الَّذِي لَا يَضُرُّ مَعَ اسْمِهِ شَيْءٌ فِي الْأَرْضِ وَلَا فِي السَّمَاءِ وَهُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ
बिस्मिल्लाहिल-लज़ी ला यज़ुर्रु मअ-स्मिहि शैउन फ़िल-अर्ज़ि व ला फ़िस-समाइ व हुवस-समीउल-अलीम
bismillāhilladhī lā yaḍurru ma‘asmihi shay’un fil-arḍi wa lā fis-samā’i wa huwas-samī‘ul-‘alīm
अल्लाह के नाम से, जिसके नाम के साथ ज़मीन में और आसमान में कोई चीज़ नुक़सान नहीं पहुँचा सकती; और वही सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।
अबू दाऊद, तिर्मिज़ी · सहीह — तीन बार, सुबह और शाम।
14माँगने का तरीक़ा
हम्द से शुरू करें, फिर नबी ﷺ पर दुरूद, फिर माँगें।
क़िबले की तरफ़ रुख़ करें, हाथ उठाएँ, और चाहें तो बाद में चेहरे पर हाथ फेर लें।
क़बूल होने के यक़ीन के साथ माँगें; “अगर तू चाहे” न कहें।
लगे रहें, और यह न कहें कि “मैंने माँगा और मेरी दुआ क़बूल नहीं हुई।”
अपनी भाषा में माँगें। अरबी शर्त नहीं — बांग्ला भी दुआ है।
तिर्मिज़ी, अबू दाऊद · सहीह
15जब क़बूलियत की उम्मीद सबसे ज़्यादा हो
रात का आख़िरी तिहाई हिस्सा · सजदे में · अज़ान और इक़ामत के बीच · जुमे की आख़िरी घड़ी · रोज़े की हालत में, इफ़्तार तक · सफ़र में · जब बारिश बरसे · मज़लूम, और वह जो अपने ग़ैर-मौजूद भाई के लिए दुआ करे।
हर दुआ क़बूल होती है — या तो वही चीज़ देकर, या उससे बेहतर कुछ देकर, या कोई तकलीफ़ टालकर।
अहमद · सहीह

बिंदीदार किनारे वाली पंक्तियाँ अरबी का तलफ़्फ़ुज़ हैं, जो उसकी हरकात से क़ायदे के मुताबिक़ बनाया गया है। ये छपी हुई किताबों से नहीं हैं और इनकी जाँच नहीं हुई है: जहाँ यह अरबी से अलग हो, वहाँ अरबी ही सही है।