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अज़कार

नमाज़ के आस-पास

अज़ान से सलाम तक।

इल्मी जाँच: अभी बाक़ी है

यह टेक्स्ट सबील की प्रिंट लाइब्रेरी से लिया गया है। इसकी इल्मी जाँच अभी जारी है; जब दो उलमा इस पर दस्तख़त कर देंगे, तब हर चीज़ के साथ उसकी जाँच करने वालों के नाम और तारीख़ दर्ज होगी।

ड्राफ़्ट तर्जुमा: मशीन ने अरबी और अंग्रेज़ी से तैयार किया है, और अभी तक किसी आलिम या मातृभाषी एडिटर ने इसे नहीं पढ़ा है। जहाँ कोई पंक्ति साफ़ न हो, वहाँ अंग्रेज़ी दिखाएँ और अरबी पर भरोसा करें।

iअज़ान सुनने पर
फिर दुआ
اللَّهُمَّ رَبَّ هَٰذِهِ الدَّعْوَةِ التَّامَّةِ وَالصَّلَاةِ الْقَائِمَةِ، آتِ مُحَمَّدًا الْوَسِيلَةَ وَالْفَضِيلَةَ، وَابْعَثْهُ مَقَامًا مَحْمُودًا الَّذِي وَعَدْتَهُ
अल्लाहुम्म रब्ब हाज़िहिद-दअवतित-ताम्मति वस-सलातिल-क़ाइमह, आति मुहम्मदनिल-वसीलत वल-फ़ज़ीलह, व-बअस्हु मक़ामन मह्मूदनिल-लज़ी वअद्तह
Allāhumma Rabba hādhihid-da‘watit-tāmmah waṣ-ṣalātil-qā’imah, āti Muḥammadanil-wasīlata wal-faḍīlah, wab‘ath-hu maqāman maḥmūdanil-ladhī wa‘adtah
ऐ अल्लाह, इस कामिल पुकार और क़ायम होने वाली नमाज़ के रब, मुहम्मद को वसीला और फ़ज़ीलत अता फ़रमा, और उन्हें उस मक़ाम-ए-महमूद पर पहुँचा जिसका तूने उनसे वादा किया है।
बुख़ारी · सहीह — मुअज़्ज़िन के अल्फ़ाज़ दोहराएँ, फिर यह कहें; क़यामत के दिन शफ़ाअत नसीब होती है। हय्या अला… पर ला हौला व ला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाह कहें (मुस्लिम)।
iiअज़ान और इक़ामत के बीच
जितना चाहें
اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ — ثُمَّ سَلْ مَا شِئْتَ
अल्लाहुम्म सल्लि अला मुहम्मद — सुम्म सल मा शिअत
Allāhumma ṣalli ‘alā Muḥammad — then ask for whatever you wish
नबी पर दुरूद भेजें, फिर माँगें। इस वक़्फ़े में दुआ रद्द नहीं की जाती।
अबू दाऊद और तिर्मिज़ी · सहीह — “अज़ान और इक़ामत के बीच की दुआ रद्द नहीं होती।”
iiiमस्जिद में दाख़िल होना · निकलना
1×
اللَّهُمَّ افْتَحْ لِي أَبْوَابَ رَحْمَتِكَ — وَعِنْدَ الْخُرُوجِ — اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ مِنْ فَضْلِكَ
अल्लाहुम्म-फ़्तह ली अब्वाब रह्मतिक — व इन्दल-ख़ुरूज — अल्लाहुम्म इन्नी असअलुक मिन फ़ज़्लिक
Allāhumma iftaḥ lī abwāba raḥmatik — on leaving — Allāhumma innī as’aluka min faḍlik
ऐ अल्लाह, मेरे लिए अपनी रहमत के दरवाज़े खोल दे — निकलते वक़्त: ऐ अल्लाह, मैं तुझसे तेरा फ़ज़्ल माँगता हूँ।
मुस्लिम · सहीह — दाख़िल होते वक़्त पहले दायाँ पैर, निकलते वक़्त पहले बायाँ; बैठने से पहले तहिय्यतुल-मस्जिद की दो रकअतें (बुख़ारी)।
ivशुरुआती सना (तकबीर के बाद)
1×
سُبْحَانَكَ اللَّهُمَّ وَبِحَمْدِكَ، وَتَبَارَكَ اسْمُكَ، وَتَعَالَىٰ جَدُّكَ، وَلَا إِلَٰهَ غَيْرُكَ
सुब्हानक अल्लाहुम्म व बिहम्दिक, व तबारक-स्मुक, व तआला जद्दुक, व ला इलाह ग़ैरुक
Subḥānaka Allāhumma wa biḥamdik, wa tabārakasmuk, wa ta‘ālā jadduk, wa lā ilāha ghayruk
ऐ अल्लाह, तू पाक है और तेरी ही हम्द है। तेरा नाम बरकत वाला है, तेरी शान बुलंद है, और तेरे सिवा कोई माबूद नहीं।
अबू दाऊद, तिर्मिज़ी और नसाई · सहीह — तअव्वुज़ और अल-फ़ातिहा से पहले आहिस्ता पढ़ी जाती है।
vहर रकअत के अंदर
हर एक 3×
سُبْحَانَ رَبِّيَ الْعَظِيمِ — سَمِعَ اللَّهُ لِمَنْ حَمِدَهُ · رَبَّنَا لَكَ الْحَمْدُ — سُبْحَانَ رَبِّيَ الْأَعْلَىٰ — رَبِّ اغْفِرْ لِي
सुब्हान रब्बियल-अज़ीम — समिअल्लाहु लिमन हमिदह · रब्बना लकल-हम्द — सुब्हान रब्बियल-अअला — रब्बि-ग़्फ़िर ली
Rukū‘: Subḥāna Rabbiyal-‘Aẓīm (3×) · rising: Sami‘allāhu liman ḥamidah — Rabbanā laka(l)-ḥamd · sujūd: Subḥāna Rabbiyal-A‘lā (3×) · between prostrations: Rabbighfir lī
पाक है मेरा रब, जो बड़ी अज़मत वाला है · अल्लाह ने उसकी सुन ली जिसने उसकी हम्द की — ऐ हमारे रब, तेरे ही लिए सारी हम्द है · पाक है मेरा रब, जो सबसे बुलंद है · ऐ मेरे रब, मुझे बख़्श दे।
बुख़ारी, मुस्लिम, अबू दाऊद · सहीह — सजदे की दुआ के क़बूल होने की सबसे ज़्यादा उम्मीद है (मुस्लिम)।
हिस्सा 2 · सलाम से पहले
आख़िरी क़ादा पूरा — तशह्हुद, दुरूद, फिर ये दो दुआएँ, जिनकी जगह नमाज़ के अंदर है, उसके बाद नहीं — यह वह जगह है जिसमें बहुत-से लोग ग़लती करते हैं।
αअत-तहिय्यात (तशह्हुद)
हर क़ादे में
التَّحِيَّاتُ لِلَّهِ وَالصَّلَوَاتُ وَالطَّيِّبَاتُ، السَّلَامُ عَلَيْكَ أَيُّهَا النَّبِيُّ وَرَحْمَةُ اللَّهِ وَبَرَكَاتُهُ، السَّلَامُ عَلَيْنَا وَعَلَىٰ عِبَادِ اللَّهِ الصَّالِحِينَ، أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ
अत-तहिय्यातु लिल्लाहि वस-सलवातु वत-तय्यिबात, अस-सलामु अलैक अय्युहन-नबिय्यु व रह्मतुल्लाहि व बरकातुह, अस-सलामु अलैना व अला इबादिल्लाहिस-सालिहीन, अश्हदु अन ला इलाह इल्लल्लाहु व अश्हदु अन्न मुहम्मदन अब्दुहु व रसूलुह
At-taḥiyyātu lillāhi waṣ-ṣalawātu waṭ-ṭayyibāt, as-salāmu ‘alayka ayyuhan-Nabiyyu wa raḥmatullāhi wa barakātuh, as-salāmu ‘alaynā wa ‘alā ‘ibādillāhiṣ-ṣāliḥīn, ash-hadu an lā ilāha illallāh wa ash-hadu anna Muḥammadan ‘abduhū wa Rasūluh
तमाम ताज़ीमें, नमाज़ें और पाकीज़ा चीज़ें अल्लाह के लिए हैं। ऐ नबी, आप पर सलाम हो, और अल्लाह की रहमत और उसकी बरकतें। सलाम हो हम पर और अल्लाह के नेक बंदों पर। मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, और मैं गवाही देता हूँ कि मुहम्मद उसके बंदे और उसके रसूल हैं।
बुख़ारी और मुस्लिम · सहीह — इब्न मसऊद; हनफ़ी अल्फ़ाज़। शाफ़ई/मालिकी मज़हब इब्न अब्बास और उमर के इससे मिलते-जुलते अल्फ़ाज़ इस्तेमाल करते हैं, सब मुस्तनद हैं।
βदुरूद-ए-इब्राहीमी
आख़िरी क़ादा
اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَعَلَىٰ آلِ مُحَمَّدٍ، كَمَا صَلَّيْتَ عَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ وَعَلَىٰ آلِ إِبْرَاهِيمَ، إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ. اللَّهُمَّ بَارِكْ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَعَلَىٰ آلِ مُحَمَّدٍ، كَمَا بَارَكْتَ عَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ وَعَلَىٰ آلِ إِبْرَاهِيمَ، إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ
अल्लाहुम्म सल्लि अला मुहम्मदिन व अला आलि मुहम्मद, कमा सल्लैत अला इब्राहीम व अला आलि इब्राहीम, इन्नक हमीदुन मजीद. अल्लाहुम्म बारिक अला मुहम्मदिन व अला आलि मुहम्मद, कमा बारक्त अला इब्राहीम व अला आलि इब्राहीम, इन्नक हमीदुन मजीद
Allāhumma ṣalli ‘alā Muḥammadin wa ‘alā āli Muḥammad, kamā ṣallayta ‘alā Ibrāhīma wa ‘alā āli Ibrāhīm, innaka Ḥamīdun Majīd. Allāhumma bārik ‘alā Muḥammadin wa ‘alā āli Muḥammad, kamā bārakta ‘alā Ibrāhīma wa ‘alā āli Ibrāhīm, innaka Ḥamīdun Majīd
ऐ अल्लाह, मुहम्मद पर और मुहम्मद की आल पर रहमत नाज़िल फ़रमा, जैसे तूने इब्राहीम पर और इब्राहीम की आल पर रहमत नाज़िल फ़रमाई — बेशक तू तारीफ़ के लायक़, बुज़ुर्गी वाला है। ऐ अल्लाह, मुहम्मद पर और मुहम्मद की आल पर बरकत नाज़िल फ़रमा, जैसे तूने इब्राहीम पर और इब्राहीम की आल पर बरकत नाज़िल फ़रमाई — बेशक तू तारीफ़ के लायक़, बुज़ुर्गी वाला है।
बुख़ारी और मुस्लिम · सहीह — वह जवाब जो आप ﷺ ने तब दिया जब पूछा गया कि आप पर दुरूद कैसे भेजा जाए। फिर नीचे की दो दुआएँ, फिर सलाम।
Aचार चीज़ों से पनाह
1×
اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ عَذَابِ جَهَنَّمَ، وَمِنْ عَذَابِ الْقَبْرِ، وَمِنْ فِتْنَةِ الْمَحْيَا وَالْمَمَاتِ، وَمِنْ شَرِّ فِتْنَةِ الْمَسِيحِ الدَّجَّالِ
अल्लाहुम्म इन्नी अऊज़ु बिक मिन अज़ाबि जहन्नम, व मिन अज़ाबिल-क़ब्र, व मिन फ़ित्नतिल-मह्या वल-ममात, व मिन शर्रि फ़ित्नतिल-मसीहिद-दज्जाल
Allāhumma innī a‘ūdhu bika min ‘adhābi jahannam, wa min ‘adhābil-qabr, wa min fitnatil-maḥyā wal-mamāt, wa min sharri fitnatil-Masīḥid-Dajjāl
ऐ अल्लाह, मैं तेरी पनाह माँगता हूँ जहन्नम के अज़ाब से, क़ब्र के अज़ाब से, ज़िंदगी और मौत के फ़ितने से, और मसीह दज्जाल के फ़ितने की बुराई से।
मुस्लिम · सहीह — हुक्म दिया गया: “जब तुममें से कोई आख़िरी तशह्हुद से फ़ारिग़ हो, तो चार चीज़ों से पनाह माँगे।”
Bअबू बक्र की दुआ
1×
اللَّهُمَّ إِنِّي ظَلَمْتُ نَفْسِي ظُلْمًا كَثِيرًا، وَلَا يَغْفِرُ الذُّنُوبَ إِلَّا أَنْتَ، فَاغْفِرْ لِي مَغْفِرَةً مِنْ عِنْدِكَ وَارْحَمْنِي، إِنَّكَ أَنْتَ الْغَفُورُ الرَّحِيمُ
अल्लाहुम्म इन्नी ज़लम्तु नफ़्सी ज़ुल्मन कसीरन, व ला यग़्फ़िरुज़-ज़ुनूब इल्ला अन्त, फ़-ग़्फ़िर ली मग़्फ़िरतन मिन इन्दिक व-र्हम्नी, इन्नक अन्तल-ग़फ़ूरुर-रहीम
Allāhumma innī ẓalamtu nafsī ẓulman kathīran, wa lā yaghfirudh-dhunūba illā Anta, faghfir lī maghfiratan min ‘indika warḥamnī, innaka Antal-Ghafūrur-Raḥīm
ऐ अल्लाह, मैंने अपनी जान पर बहुत ज़ुल्म किया है, और तेरे सिवा कोई गुनाहों को नहीं बख़्शता। तो अपनी तरफ़ की मग़फ़िरत से मुझे बख़्श दे, और मुझ पर रहम फ़रमा। बेशक तू ही बहुत बख़्शने वाला, निहायत रहम वाला है।
बुख़ारी और मुस्लिम · सहीह — अबू बक्र को सिखाई गई जब उन्होंने अपनी नमाज़ में पढ़ने के लिए एक दुआ माँगी।
हिस्सा 3 · हर फ़र्ज़ के बाद

बिंदीदार किनारे वाली पंक्तियाँ अरबी का तलफ़्फ़ुज़ हैं, जो उसकी हरकात से क़ायदे के मुताबिक़ बनाया गया है। ये छपी हुई किताबों से नहीं हैं और इनकी जाँच नहीं हुई है: जहाँ यह अरबी से अलग हो, वहाँ अरबी ही सही है।