iअज़ान सुनने पर
फिर दुआ
اللَّهُمَّ رَبَّ هَٰذِهِ الدَّعْوَةِ التَّامَّةِ وَالصَّلَاةِ الْقَائِمَةِ، آتِ مُحَمَّدًا الْوَسِيلَةَ وَالْفَضِيلَةَ، وَابْعَثْهُ مَقَامًا مَحْمُودًا الَّذِي وَعَدْتَهُ
अल्लाहुम्म रब्ब हाज़िहिद-दअवतित-ताम्मति वस-सलातिल-क़ाइमह, आति मुहम्मदनिल-वसीलत वल-फ़ज़ीलह, व-बअस्हु मक़ामन मह्मूदनिल-लज़ी वअद्तह
Allāhumma Rabba hādhihid-da‘watit-tāmmah waṣ-ṣalātil-qā’imah, āti Muḥammadanil-wasīlata wal-faḍīlah, wab‘ath-hu maqāman maḥmūdanil-ladhī wa‘adtah
ऐ अल्लाह, इस कामिल पुकार और क़ायम होने वाली नमाज़ के रब, मुहम्मद को वसीला और फ़ज़ीलत अता फ़रमा, और उन्हें उस मक़ाम-ए-महमूद पर पहुँचा जिसका तूने उनसे वादा किया है।
बुख़ारी · सहीह — मुअज़्ज़िन के अल्फ़ाज़ दोहराएँ, फिर यह कहें; क़यामत के दिन शफ़ाअत नसीब होती है। हय्या अला… पर ला हौला व ला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाह कहें (मुस्लिम)।